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Inside 5 Reason: Prashant Kishor की जीत से तय हुआ सम्राट की कुर्सी जाने वाली है!

samrat prashant

प्रशांत किशोर(Prashant Kishor, Jansuraj) बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव(Bankipur) जीत गये. बिहार बीजेपी के नेता और सरकार में मंत्री विजय कुमार सिन्हा का बयान आया है. उन्होंने कहा, “पार्टी गहन समीक्षा करेगी.” सिर्फ इस बयान से समझिए हार बीजेपी के उम्मीदवार की हुई है या बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की कुर्सी खतरे में आ गई है.

क्या योगी वाला खेला खेल गये नितिन नबीन?

प्रशांत किशोर की जीत के साथ पार्टी फोरम पर नितिन नबीन यह कह सकते हैं कि बीजेपी की झोली में यह सीट मेरी निजी संबंधों की वजह से जाती रही है. ठीक वैसे ही समझिए जैसे योगी आदित्यनाथ जैसे ही गोरखपुर संसदीय सीट छोड़ मुख्यमंत्री बनें उस वक्त BJP ने योगी खेमा के विरोधी माने जाने वाले उपेंद्र शुक्ला को बीजेपी ने चुनाव लड़ाया वे हार गये. फिर योगी की सहमति से रविकिशन लगातार जीत रहे हैं. इस तरह रवि किशन कभी भी योगी आदित्यनाथ की संसदीय सीट के प्रमुख दावेदार बन ही नहीं पाएंगे. सियासत में कहते हैं जो दिखता है वह होता नहीं. क्या नितिन नबीन भी यही खेला खेल गये.

प्रशांत किशोर की जीत से कितने हुए शिकार

सम्राट चौधरी
लालू यादव की पार्टी

प्रशांत किशोर दोधारी तलवार

12 साल बाद ऐसा पहली बार होने जा रहा है कि बीजेपी कोई ऐसी सीट पर हारी है, जहां हिंदू आबादी बहुसंख्यक है, ऊंची जातियों का प्रभाव माना जाता है और मुस्लिम व अन्य अल्पसंख्यक मतदाता अपेक्षाकृत कम हैं.

यह जीत सिर्फ प्रशांत किशोर की नहीं है. यह गुस्सा उन लोगों का है जिसे बीजेपी गुलाम मतदाता की तरह ट्रीट कर रही थी. यह गुस्सा सम्राट चौधरी के बीजेपी संस्कार के बजाए आरजेडी वाला कल्चर से सरकार चलाने का है. ऐसा बीजेपी के पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना है. RJD का कोर वोट बैंक बांकीपुर में प्रशांत किशोर के पाले में चला गया, तो क्या मुस्लिम मतदाता और यादव के नौजवान प्रशांत किशोर के डेवलपमेंट में ज्यादा भरोसा कर रहे हैं. अर्थात सवर्ण और मुस्लिम एकसाथ प्रशांत किशोर के पाले में जा सकते हैं. इस तरह प्रशांत किशोर दोधारी तलवार हो सकते हैं. जो सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को काट रहे हैं.

भूमिहार समेत सवर्ण सम्राट से नाराज

क्या बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बीजेपी (BJP) के कोर वोट बैंक भूमिहार समुदाय से चिढ़े हुए हैं, इन्हें नापसंद करते हैं. या सियासी नासमझ हैं. बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव यह तय कर दिया कि सवर्ण युवा प्रशांत किशोर की तरफ रूख अख्तियार कर रहा है और बीजेपी का ‘बंधुआ मजदूर’ अब नहीं रहेगा.

अपनी जाति दीपक के लिए भूमिहार की ‘बलि’ लिये सम्राट चौधरी?

अब सवाल ये है कि इसके लिए भूमिहार को ही बलि का बकरा क्यों बनाया गया? स्वजातीय नेता को सदन पहुंचाने के लिए सम्राट चौधरी ने भूमिहार की कुर्सी को कुर्बान क्यों किया? अभी दो महीने पहले ही 9 MLC भेजे गए थे, जिनमें एक भी भूमिहार नहीं था. बड़ा सवाल यह है कि क्या बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और वर्तमान कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा से सियासी अदावत में वह पूरे भूमिहार समुदाय को अपना दुश्मन समझ रहे हैं सम्राट चौधरी. वैसे भी सम्राट चौधरी लालू प्रसाद यादव के स्कूल से निकले हैं, यह सर्वविदित है कि भूमिहार बनाम लालू यादव बिहार की सच्चाई थी जिसका फायदा बीजेपी ने योद्धा जाति भूमिहार को अपने पाले में लाकर सत्ता के शिखर तक पहुंची.

भूमिहार ब्राह्मण विवाद

बीजेपी का कोर वोट बैंक, बूथ पर पिछले 40 साल से धन और जन की हानि झेलकर बीजेपी को सत्ता के शिखर तक पहुंचाने वाली जाति भूमिहार को सम्राट चौधरी सरकार ने आते ही छेड़ा. इसको कहावत की नजर से देखें तो आ बैल मुझे मार वाली लगती है. पहले से नाखुश समुदाय को अपने पाले में लाने के बजाए इसे दुश्मन की तरह सम्राट सरकार ने ट्रीट किया.

बिहार में अधिकांश सवर्ण विधायक सम्राट चौधरी ने नाराज हैं. कुर्मी विधायक नाखुश हैं वजह-नीतीश कुमार की ऐसी बिदाई. बिहार विधानसभा में ‘भूमिहार-ब्राह्मण’ और ‘भूमिहार’ जाति नाम को लेकर तीखी बहस हुई,

Explainer 4 बड़ी वजह : सम्राट चौधरी को BJP हटाने वाली है?

जिसमें BJP विधायकों ने पुराने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए ‘भूमिहार-ब्राह्मण’ नाम दर्ज करने की मांग की. 1931 की जनगणना से लेकर राजस्व रिकॉर्ड तक का दिया हवाला. जिवेश कुमार ने कहा कि वर्ष 1931 की जनगणना रिपोर्ट के साथ-साथ राजस्व विभाग के कई भू-अभिलेखों में भी जाति का नाम ‘भूमिहार-ब्राह्मण’ दर्ज होने का उल्लेख मिलता है.

डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव ने साफ कर दिया कि सरकारी सूची में ‘भूमिहार’ जाति का ही उल्लेख है.

उन्होंने कहा कि ‘भूमिहार-ब्राह्मण’ लिखने से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है.

कानून-व्यवस्था पर नाकामी

सम्राट चौधरी की छवि पर प्रशांत किशोर ने जो बट्टा लगाया है उसे सुधारने के बजाए, प्रशासन पर कमजोर पकड़ लगातार दिख रहा है.

बिहार में दबे जुबान तबादला धंधा खूब चर्चा में है.

नीतीश कुमार के हटते ही सबसे पहले कानून व्यवस्था खराब चल रहा है.

जिसे आम लोग महसूस कर रहे हैं.

छात्रों पर पुलिसिया अत्याचार

NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन के बाद बिहार पुलिस ने छात्रों पर कई जगह लाठीचार्ज किया है.

आलम यह है कि करीब 600 छात्रों को डिटेन किया गया है. सोचिए ऐसी कार्रवाई तब हो रही है जब दिल्ली में केंद्र सरकार प्रदर्शनकारी

छात्रों पर पुलिस कार्रवाई नहीं करने का ऐलान किया है.

देशभर में लगभग परीक्षा लीक के 41 मामलों के तार बिहार से जुड़े और 1.4 करोड़ से अधिक युवा प्रतिभागी प्रभावित हो गए.

पटना में छात्र आंदोलन हिंसक कैसे हो गया?

  • आखिर आंदोलन मूल मुद्दे से भटक कर हिंसा पर कैसे आया?
  • जिला प्रशासन से स्थिति की भयावहता समझने में चूक कैसे हुई?
  • आखिर क्यों छात्रों के अंदर का गुस्सा पुलिस और मीडिया पर उतरा?
  • इन उपरोक्त सवालों पर काम करने के बजाए जिन छात्रों को जेल भेजोगे पीटोगे उनके माता पिता आशीर्वाद तो देंगे नहीं.

कुल मिलाकर सम्राट सरकार सबको नाराज करके बैठी है. और जनता को नाराज करके आप कितने दिन लोकतंत्र में सम्राट बने रहेंगे.