Bihar cm samrat chaudhary, student, paper leak: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी मंद मंद मुस्कुरा रहे होंगे. बिहार सरकार के मुखिया सम्राट चौधरी अभी सियासी कमजोर खिलाड़ी साबित हो रहे हैं. ना तो शासन ना ही प्रशासन पर उनकी पकड़ दिख रही है. बिहार में सियासी महाभारत में नीतीश कुमार के अंतिम दांव की वजह से सम्राट चौधरी मगध के मुखिया तो बन गये लेकिन बनते ही अफरा तफरी मची है. सियासी संकट से घिरे सम्राट चौधरी की बिदाई की बेला में भले ही वक्त हो लेकिन उसके आहट की नींव खुद सम्राट चौधरी ने रख दिया है.
भूमिहार ब्राह्मण विवाद
बीजेपी का कोर वोट बैंक, बूथ पर पिछले 40 साल से धन और जन की हानि झेलकर बीजेपी को सत्ता के शिखर तक पहुंचाने वाली जाति भूमिहार को सम्राट चौधरी सरकार ने आते ही छेड़ा. इसको कहावत की नजर से देखें तो आ बैल मुझे मार वाली लगती है. पहले से नाखुश समुदाय को अपने पाले में लाने के बजाए इसे दुश्मन की तरह सम्राट सरकार ने ट्रीट किया. बिहार में अधिकांश सवर्ण विधायक सम्राट चौधरी ने नाराज हैं. कुर्मी विधायक नाखुश हैं वजह-नीतीश कुमार की ऐसी बिदाई.
बिहार विधानसभा में ‘भूमिहार-ब्राह्मण’ और ‘भूमिहार’ जाति नाम को लेकर तीखी बहस हुई, जिसमें BJP विधायकों ने पुराने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए ‘भूमिहार-ब्राह्मण’ नाम दर्ज करने की मांग की. 1931 की जनगणना से लेकर राजस्व रिकॉर्ड तक का दिया हवाला. जिवेश कुमार ने कहा कि वर्ष 1931 की जनगणना रिपोर्ट के साथ-साथ राजस्व विभाग के कई भू-अभिलेखों में भी जाति का नाम ‘भूमिहार-ब्राह्मण’ दर्ज होने का उल्लेख मिलता है.
डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव ने साफ कर दिया कि सरकारी सूची में ‘भूमिहार’ जाति का ही उल्लेख है. उन्होंने कहा कि ‘भूमिहार-ब्राह्मण’ लिखने से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है.
कानून-व्यवस्था पर नाकामी
सम्राट चौधरी की छवि पर प्रशांत किशोर ने जो बट्टा लगाया है उसे सुधारने के बजाए, प्रशासन पर कमजोर पकड़ लगातार दिख रहा है. बिहार में दबे जुबान तबादला धंधा खूब चर्चा में है. नीतीश कुमार के हटते ही सबसे पहले कानून व्यवस्था खराब चल रहा है. जिसे आम लोग महसूस कर रहे हैं.
छात्रों पर पुलिसिया अत्याचार
NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन के बाद बिहार पुलिस ने छात्रों पर कई जगह लाठीचार्ज किया है. आलम यह है कि करीब 600 छात्रों को डिटेन किया गया है. सोचिए ऐसी कार्रवाई तब हो रही है जब दिल्ली में केंद्र सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई नहीं करने का ऐलान किया है. देशभर में लगभग परीक्षा लीक के 41 मामलों के तार बिहार से जुड़े और 1.4 करोड़ से अधिक युवा प्रतिभागी प्रभावित हो गए.
- पटना में छात्र आंदोलन हिंसक कैसे हो गया?
- आखिर आंदोलन मूल मुद्दे से भटक कर हिंसा पर कैसे आया?
- जिला प्रशासन से स्थिति की भयावहता समझने में चूक कैसे हुई?
- आखिर क्यों छात्रों के अंदर का गुस्सा पुलिस और मीडिया पर उतरा?
इन उपरोक्त सवालों पर काम करने के बजाए जिन छात्रों को जेल भेजोगे पीटोगे उनके माता पिता आशीर्वाद तो देंगे नहीं. कुल मिलाकर सम्राट सरकार सबको नाराज करके बैठी है. और जनता को नाराज करके आप कितने दिन लोकतंत्र में सम्राट बने रहेंगे.
बांकीपुर चुनाव परिणाम नांव में कील
बांकीपुर चुनाव में JDU कम इंट्रेस्ट ले रही? नीतीश के फाइनल कॉल के बाद नेता सक्रिय हुए हैं. बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में GenZ फैक्टर भी दिख रहा है. ऐसे में यह भी चर्चा है कि यह फैक्टर इस सीट पर कितना काम करेगा. बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में कॉलेज, विश्वविद्यालय, कोचिंग संस्थान और छात्रावास हैं. पटना विश्वविद्यालय, एनआईटी पटना, बीएन कॉलेज, साइंस कॉलेज, एएन कॉलेज, चाणक्य लॉ यूनिवर्सिटी और कई बड़े कोचिंग संस्थानों की वजह से यहां हर साल हजारों छात्र पढ़ाई के लिए आते हैं. निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार बांकीपुर विधानसभा में करीब 3.79 लाख मतदाता हैं. इनमें लगभग 1.20 से 1.35 लाख मतदाता 18 से 29 साल की उम्र के हैं. यानी करीब एक-तिहाई मतदाता युवा हैं. यही वजह है कि इस बार जेनज़ी को चुनाव का बड़ा फैक्टर माना जा रहा है. एक बात तय है कि युवा नाराज हैं लेकिन बीजेपी का संगठन बूथ मैनेजमेंट बहुत मजबूत है. लेकिन सवाल तो यही है कि क्या बीजेपी का अपना संगठन ही सम्राट चौधरी के खिलाफ है? यदि बीजेपी अपने गढ़ में हार गई तो सरकार बनने के बाद पहला उपचुनाव अपने गढ़ में बीजेपी का हारना सम्राट चौधरी की नांव डुबोने के के लिए काफी होगा.



























