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NEET Paper Leak: Congress ने खेला कर दिया, Helpline Number

gen z protest

NEET Paper Leak NEET-UG पेपर लीक और उससे जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन में हिस्सा लेने के कारण जिन युवाओं को पुलिस कार्रवाई का

सामना करना पड़ रहा है, उन छात्रों के लिए कांग्रेस ने कानूनी सहायता हेल्पलाइन की घोषणा की है|

इसकी जानकारी एक्टिविस्ट गुरमेहर कौर ने दी है|

कांग्रेस ने सोमवार (27 जुलाई 2026) को प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो पोस्ट करते हुए कहा, “हम छात्रों पर हुए सभी हमलों की कड़ी निंदा करते हैं|

बातचीत के दौरान मोदी सरकार ने वादा किया था कि किसी भी छात्र को हिरासत में नहीं लिया जाएगा और उनके खिलाफ

कोई पुलिस कार्रवाई नहीं होगी|

.” गुरमेहर कौर ने कहा, “आज, पश्चिम बंगाल और बिहार में छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR की एक लंबी सूची है.”|

कांग्रेस ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पुलिस की कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है.

इसे मुद्दे को कांग्रेस ने संसद में भी उठाने की कोशिश की थी. |

कांग्रेस ने ‘छात्रों की गूंज’ (CKG) लीगल SOS हेल्पलाइन 98118-67474 नंबर के जरिए अपना समर्थन देने की घोषणा की|

CJP और BJP :NEET Paper Leak सियासत में जो दिखता है, वह होता नहीं है. और जो होता है वह दिखता नहीं है.

सियासी शतरंज में CJP और BJP की ‘फिक्स मैच’ का सुखद अंत हो गया.

अब सवाल यह है कि

●इस मैच की जरूरत क्यों पड़ी ?

● विपक्ष और खासकर कांग्रेस और राहुल गांधी को क्या मिला?

●सभी का रोल किसने और क्यों तय किया?

●अभी दिल्ली की सल्तनत पर असली संघर्ष किनके बीच है?

CJP और BJP का ‘फिक्स मैच’ कैसे

इसके लिए वक्त का पहिया थोड़ा पीछे ले चलिए. किसान आंदोलन, शाहीनबाग आंदोलन, यूजीसी के जनरल समुदाय के

आंदोलन से सरकार के निपटने के तरीकों को याद करिए|

यूजीसी के आंदोलन के लिए इसी जंतर मंतर पर परमिशन तक नहीं दी गई. दिल्ली बॉर्डर तो छोड़िए नेताओं को उनके

गांव में ही गिरफ्तार कर लिया गया|

किसान आंदोलन में रास्ते पर लोहे के कील बिछाए गये|

इधर सीजेपी आंदोलन में पानी का बौछार और चंद डंडे और सरकार बहादुर ने इस्तीफा दिला दिया|

आपको अभी भी दाल में कुछ काला नहीं लगता है तो आप ‘पत्रकारिता के छात्र’ तो नहीं है|

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CJP और BJP की ‘फिक्स मैच’ की जरूरत क्यों पड़ी?

वक्त का पहिया थोड़ा पीछे ले चलिए. बीजेपी में 75 साल की चर्चा चलवाकर संघ ने बीजेपी के मजबूत ब्रैंड मोदी की

सम्मानजनक बिदाई का रास्ता तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दिया|

तो अब मोहन भागवत की उम्र का हवाला देकर मोदी टीम ने संघ पर घेराव डाला. फिर बात ठंडे बस्ते में चली गई|

इस दौरान नितिन गडकरी और टीम योगी को लेकर सियासी गलियारे में चर्चा भी तेज चली|

फिर पलटवार में गडकरी के बेटे को लेकर इथेनॉल पर अंडर करंट चलने लगा. ठीक उसी तरह जैसे कभी 2013 में पूर्ति

घोटाले की चर्चा कराई गई थी|

CJP के आंदोलन वाले तीर कितने लक्ष्य को भेद रही?

अब सवाल यह है कि CJP के आंदोलन वाले तीर कितने लक्ष्य को भेद रही है.

पहला

●संघ पर बिलो द बेल्ट वॉर,

● राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस.

संघ की ताकत क्या है उसकी छवि, हिन्दुत्व की छवि और ईमानदारी की छवि.

चढ़ावा चोरी केस को टीवी मीडिया में महीनों चलवाया गया. इसका असर किस पर, जवाब-संघ की छवि पर.

यदि आपको लगता है कि टीवी अचानक बहुत स्वतंत्र है और चढ़ावा चोरी केस पर प्राइम टाइम से लेकर 24 घंटे अयोध्या

में पड़ाव ‘इशारों’ के बगैर है तो आप बेहद मासूम हैं|

क्या शिक्षा और संस्कृति संघ के कोटे में है?

एक मुद्दे को बहुत दिनों तक घसीटा नहीं जा सकता है. तो फिर… ? खबरों की दुनिया का हर व्यक्ति जानता है कि

शिक्षा और संस्कृति संघ के कोटे में है|

बिना संघ की सहमति के एक नियुक्ति नहीं हुई है. यह सत्ता के गलियारे से लेकर संस्थानों की भर्तियों की सूची से स्पष्ट है|

धर्मेंद्र प्रधान यदि आलाकमान के गुट के होते तो उड़ीसा के सीएम बन चुके होते. इस्तीफा हुआ, लक्ष्य भेदा गया|

क्या धर्मेन्द्र प्रधान का अचानक इस्तीफा देना काँग्रेस को सत्ता से और दूर करदिया ?

इसके साथ दूसरा लक्ष्य. सत्ता विरोधी एक नया अपना विपक्ष तैयार हुआ ठीक उसी तरह जैसे अन्ना आंदोलन के

जरिए संघ ने कांग्रेस के साथ खेला किया|

लेकिन केजरीवाल कंट्रोल से बाहर हो गया और अति महत्वाकांक्षा में गुजरात चुनाव लड़ गये फिर जो हश्र हुआ सबके सामने है|

सीजेपी ने राजनीति में ना आने की संभावना से इनकार नहीं किया है. मान लीजिए सत्ता विरोधी Gen Z मतदाता यदि विपक्ष

के साथ जुड़ जाता तो सत्ता विरोधी लहर बन जाती जो सत्ता के लिए बेहद खतरनाक स्थिति होती|

इसीलिए राहुल गांधी शुरू के दिनों में इस आंदोलन से कभी नहीं जुड़े. दूर ही रहे. फिर इस आंदोलन में आईसा जुड़ जाती है.

तब राहुल गांधी आईसा को प्रोमोट करते हुए उन छात्रों के साथ दिखे. अंत समय में प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देकर क्रेडिट

की सियासी फसल काट ही रहे थे कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और टीम टीवी मीडिया के जरिए सीजेपी को क्रेडिट दिलवाकर विपक्ष

को किनारे लगा दिया गया|

अब आगे क्या, छात्र नाराज हैं. कुछ अभिभावक भी बेहद गुस्से में हैं. सत्ता से नाराज वोट यदि सीजेपी के पाले में चला जाए तो

बीजेपी की जीत सुनिश्चित रहेगी|

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इंटरनेशनल एंगल से भी इस्तीफा बेहद जरूरी?

इस सियासी उठापटक के बीच सरकार को यह भी लगा जैसे नेपाल, बांग्लादेश में सीआईए ने सफलता हासिल किया.

अमेरिका यहां भी खेला ना कर दे. फिर इस्तीफा प्रैशर कुकर का सेफ्टी वाल्व बना.

दिल्ली की सल्तनत पर असली संघर्ष किनके बीच है?

दिल्ली सल्तनत पर 2029 के लिए उठापटक बीजेपी में जारी है. संघ नये नेतृत्व को उभारना चाहता है

ब्रैंड मोदी की ससम्मान बिदाई चाहता है|

लेकिन बीजेपी के वर्तमान आलाकमान कुर्सी छोड़ने पर तैयार नहीं है|

हस्तिनापुर के साम्राज्य का नेतृत्व कौन कारेगा यह भविष्य के गर्भ में है|