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नारायणी का कहर…बेबस जिंदगी, 50 हजार आबादी बाढ़ की चपेट में

Kushinagar: कभी जिन घरों में चूल्हे की आग और बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, आज वहां पानी और बेबसी का मंजर है। पानी घट रहा है, लेकिन लोगों के सामने घर लौटने, सामान बचाने और जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने की बड़ी चुनौती खड़ी है।

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दियारा के लोगों की यही उम्मीद है—नदी का पानी पूरी तरह उतरे और वे फिर अपने घरों की चौखट पर लौट सकें। नारायणी नदी का जलस्तर भले ही अब धीरे-धीरे घटने लगा हो, लेकिन दियारा क्षेत्र के लोगों की मुश्किलें अभी कम नहीं हुई हैं। बाढ़ ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को पूरी तरह उथल-पुथल कर दिया है।

कुशीनगर जनपद के सालिकपुर और महदेवा गांव के लोग अपने घर छोड़कर बाढ़ राहत कैंप में पहुंच रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा बनाए गए इन राहत कैंपों में प्रभावित परिवारों के लिए कम्युनिटी किचन के माध्यम से भोजन की व्यवस्था की जा रही है। वहीं शाहपुर, भगवानपुर और लक्ष्मीपुर पड़रहवा जैसे गांव अभी भी जलमग्न हैं। दियारा क्षेत्र के बसंतपुर, हरिहरपुर, मरचहवा, नारायनपुर और शिवपुर में भी नारायणी यानी गंडक नदी की बाढ़ का असर साफ दिखाई दे रहा है।

रिपोर्ट- आनन्द सिंह/खड्डा-कुशीनगर