राजस्थान पुलिस के Special Operations Group (SOG) ने चेन्नई स्थित भारत सेवक समाज (BSS) के निदेशक अरुण गनाना मोइस को सरकारी भर्तियों में बिना प्रशिक्षण के बैक-डेट में फर्जी फायरमैन, लाइब्रेरियन और तकनीकी डिप्लोमा व सर्टिफिकेट जारी करने के बड़े रैकेट में गिरफ्तार किया था. ताजा अपडेट के मुताबिक उसे इस मामले में जमानत मिल गई है.
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मुख्य खुलासे और कार्यप्रणाली (Modus Operandi)
- संस्थान बिना किसी सरकारी या वैधानिक मान्यता के खुद को योजना आयोग से अधिकृत बताकर देशभर के हजारों कॉलेजों को फ्रेंचाइजी/संबद्धता देता था.
- संबद्धता के नाम पर प्रत्येक कॉलेज से ₹70,000 से ₹1 लाख तक वसूले जाते थे.
- बिना किसी क्लास या ट्रेनिंग के महज 2 से 3 दिन के भीतर बैक-डेट में मार्कशीट और डिप्लोमा तैयार करके कूरियर या व्हाट्सएप के जरिए भेजे जाते थे.
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ताज़ा अपडेट्स (Latest Updates)
- गिरफ्तारी: एसओजी ने मुख्य निदेशक को गिरफ्तार और जमानत. चेयरमैन बी.एस. बालचंद्रन की तलाश के लिए दबिश जारी है.
- रडार पर अभ्यर्थी: फायरमैन भर्ती में 19 और लाइब्रेरियन भर्ती परीक्षा के आवेदनों में लगभग 400 संदेहास्पद डिग्रियां सामने आई हैं, जिनकी गहन जांच की जा रही है.
- कार्रवाई: एसओजी ने स्पष्ट किया है कि भारत सेवक समाज (BSS) चेन्नई से जारी किए गए सभी डिप्लोमा और प्रमाण पत्र पूरी तरह अवैध और अमान्य हैं.

























