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AdhikMaas: अधिक मास का महत्व, भगवान विष्णु का प्रिय महीना क्यों है?

भगवान विष्णु की दिव्य छवि के साथ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) की महिमा दर्शाता धार्मिक पोस्टर

AdhikMaas: हिंदू धर्म में अधिक मास को बहुत पवित्र माना जाता है, इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. मान्यता है कि यह महीना भगवान विष्णु को सबसे प्रिय है.

पौराणिक कथा के अनुसार, पहले इस महीने को कोई महत्व नहीं मिलता था. इसलिए यह दुखी होकर भगवान विष्णु के पास पहुंचा, तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम “पुरुषोत्तम” दिया और सबसे श्रेष्ठ महीना घोषित किया. इसी कारण अधिक मास में पूजा, भक्ति, जप और दान का विशेष महत्व माना जाता है, कहा जाता है कि इस महीने में किए गए अच्छे कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है.यही वजह है कि सनातन धर्म में अधिक मास को भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना जाता है.

क्या होता है अधिक मास?

हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित होता है. वहीं, अंग्रेजी कैलेंडर सूर्य की गति के अनुसार चलता है, इसलिए दोनों कैलेंडरों में हर साल करीब 11 दिनों का अंतर आ जाता है. धीरे-धीरे यह अंतर बढ़ता जाता है। इसके बाद लगभग 32 महीने 16 दिन में यह एक पूरे महीने के बराबर हो जाता है. इसी कारण हिंदू पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। इसे ही अधिक मास कहा जाता है.

अधिक मास की पौराणिक कथा

पुराणों में अधिक मास की एक रोचक कथा मिलती है, यह कथा पद्म पुराण और नारद पुराण में वर्णित है. प्राचीन काल में एक अतिरिक्त मास उत्पन्न हुआ, लेकिन उसका कोई देवता नहीं था. साथ ही, उससे कोई बड़ा त्योहार भी नहीं जुड़ा था. इस कारण लोग उसे कम महत्व देने लगे इतना ही नहीं, उसे मल मास भी कहा जाने लगा, क्योंकि इस दौरान विवाह और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं होते थे. तब दुखी होकर वह मास भगवान विष्णु के पास पहुंचा उसने कहा, “प्रभु, सभी मासों को सम्मान मिलता है. लेकिन मुझे कोई नहीं अपनाता.” भगवान विष्णु उसकी बात सुनकर प्रसन्न हुए फिर उन्होंने कहा, “आज से तुम पुरुषोत्तम मास कहलाओगे.” “मैं स्वयं तुम्हारा स्वामी बनता हूं.”

इसके बाद भगवान ने आशीर्वाद दिया, उन्होंने कहा कि इस मास में पूजा, दान और भक्ति करने वालों को विशेष फल मिलेगा. यही कारण है कि अधिक मास को पुरुषोत्तम मास कहा जाता है. साथ ही, इसे भगवान विष्णु का सबसे प्रिय महीना माना जाता है.

अधिक मास में क्या करना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है. इस दौरान गीता, श्रीमद्भागवत और विष्णु सहस्रनाम का पाठ शुभ माना जाता है. वहीं, गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना भी पुण्यदायक बताया गया है.

इसके अलावा मान्यता है कि इस महीने किए गए अच्छे कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए श्रद्धालु व्रत रखते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं.

अधिक मास में क्या नहीं किया जाता?

परंपरागत रूप से अधिक मास में विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते. वहीं, पूजा-पाठ और साधना के लिए यह समय बेहद शुभ माना जाता है. इसलिए श्रद्धालु इस महीने में भक्ति और दान-पुण्य पर विशेष ध्यान देते हैं.

निष्कर्ष

अधिक मास को भगवान विष्णु का सबसे प्रिय महीना इसलिए कहा जाता है |

क्योंकि भगवान ने स्वयं इसे अपना नाम और विशेष सम्मान प्रदान किया था.

इसी कारण यह महीना हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है।

इस दौरान किए गए जप, तप, दान और पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है|

यही वजह है कि करोड़ों श्रद्धालु अधिक मास को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं|

FAQs

1. अधिक मास क्या होता है?
हिंदू पंचांग में लगभग 32 महीने बाद जो अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है

उसे अधिक मास कहा जाता है.

2. अधिक मास को पुरुषोत्तम मास क्यों कहते हैं?
भगवान विष्णु ने इस महीने को अपना नाम “पुरुषोत्तम” दिया था.

इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है.

3. भगवान विष्णु का प्रिय महीना अधिक मास क्यों माना जाता है?
पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने इस उपेक्षित महीने को सम्मान देकर अपना सबसे प्रिय महीना घोषित किया था.

4. अधिक मास में कौन-से काम शुभ माने जाते हैं?
पूजा-पाठ, व्रत, जप, दान और भगवान विष्णु की आराधना करना बेहद शुभ माना जाता है.

5. अधिक मास में शादी-विवाह क्यों नहीं होते?
परंपरागत मान्यताओं के अनुसार यह महीना आध्यात्मिक साधना के लिए होता है,

इसलिए मांगलिक कार्य नहीं किए जाते.

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