AdhikMaas 2026: हिंदू पंचांग में हर कुछ सालों में एक अतिरिक्त महीना आता है, इसे अधिकमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है.
इस साल यह 17 मई से शुरू हो चुका है. लोग अक्सर पूछते हैं कि इस महीने में शादी, गृह प्रवेश या नए काम क्यों नहीं किए जाते. इसके पीछे धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं जुड़ी हुई हैं.
अधिकमास क्या होता है?
हिंदू कैलेंडर चंद्रमा और सूर्य की चाल पर आधारित होता है, लेकिन दोनों की गति में थोड़ा फर्क आ जाता है.
इस फर्क को ठीक करने के लिए हर कुछ साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है.
इस महीने में शुभ कार्य क्यों नहीं होते?
परंपरा के अनुसार, अधिकमास को एक अतिरिक्त महीना माना जाता है, इसी वजह से इसे सामान्य महीनों से अलग रखा गया है.
क्योंकि इसे किसी मुख्य देवता को समर्पित नहीं किया गया होता, इसलिए इसका धार्मिक महत्व थोड़ा अलग माना जाता है. इसलिए लोग इस समय को खास रूप से पूजा, जप और साधना के लिए उपयोग करते हैं.
कौन-कौन से काम रूक जाते हैं?
इस महीने में आमतौर पर कुछ बड़े और नए काम नहीं किए जाते.
- सबसे पहले, विवाह को इस समय टाल दिया जाता है.
- इसके अलावा, गृह प्रवेश भी नहीं किया जाता.
- साथ ही, नया व्यवसाय शुरू करना भी शुभ नहीं माना जाता.
- इसके अलावा, संपत्ति खरीदने जैसे बड़े फैसले भी रोक दिए जाते हैं.
- ये सभी काम सामान्य रूप से शुभ मुहूर्त देखकर ही किए जाते हैं.
अधिकमास को अशुभ क्यों नहीं माना जाता?
- अधिकमास को अशुभ नहीं माना जाता, बल्कि इसे एक पवित्र समय माना जाता है.
- इस महीने में पूजा और साधना का विशेष महत्व होता है.
- इसलिए लोग भक्ति और ध्यान पर ज्यादा ध्यान देते हैं.
- इसके अलावा जप, तप और दान करने से कई गुना फल मिलता है.
- इसी कारण इस समय को बहुत शुभ माना जाता है.
भगवान विष्णु से जुड़ी मान्यता
कथा के अनुसार, यह महीना पहले किसी ग्रह या देवता ने स्वीकार नहीं किया था, इसलिए इसे सामान्य महीनों से अलग माना गया. फिर बाद में भगवान विष्णु ने इसे अपनाया.

इसी वजह से इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है, इस कारण यह महीना खास माना जाता है. साथ ही इसे बहुत पवित्र समय भी माना जाता है.
इस समय क्या करना अच्छा माना जाता है?
इस महीने में धार्मिक काम करना बहुत अच्छा माना जाता है, इसे पवित्र समय कहा जाता है. लोग इस समय भगवान की पूजा ज्यादा करते हैं. इस दौरान ये काम करना अच्छा माना जाता है:
- मंत्र जप करना
- व्रत रखना और पूजा करना
- दान देना और दूसरों की मदद करना
- ध्यान लगाना और शांत बैठकर साधना करना
- ऐसा माना जाता है कि इन कामों से ज्यादा अच्छा फल मिलता है.
निष्कर्ष
अधिकमास कोई रोकने वाला महीना नहीं है, यह भक्ति और शांति का समय होता है. इस दौरान बड़े नए काम न करने की परंपरा पुरानी मान्यता पर आधारित है. इस महीने का असली मतलब है मन को शांत रखना और भगवान की भक्ति करना.
FAQs
1. अधिकमास क्या होता है?
अधिकमास हिंदू कैलेंडर में हर 3 साल में आने वाला एक अतिरिक्त महीना होता है.
2. इसे पुरुषोत्तम मास क्यों कहते हैं?
क्योंकि यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है.
3. अधिकमास में शुभ काम क्यों नहीं करते?
मान्यता है कि इस महीने में शादी और नए काम करने से पूरा फल नहीं मिलता, इसलिए इन्हें टाल दिया जाता है.
4. इस महीने में क्या करना अच्छा माना जाता है?
इस महीने में पूजा, जप, तप, दान और व्रत करना बहुत शुभ माना जाता है.
5. क्या अधिकमास अशुभ होता है?
नहीं, अधिकमास अशुभ नहीं होता. यह धार्मिक और भक्ति के लिए बहुत अच्छा समय माना जाता है


























