Advertisement

Vat Savitri Vrat 2026: क्यों की जाती है बरगद के पेड़ की पूजा? 

सुहागिन महिलाएं वट सावित्री व्रत पर बरगद के पेड़ की पूजा करती हुईं, धागा बांधकर प्रार्थना करती हुईं

Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत है, जिसे हर साल सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए करती हैं.

इस साल यह व्रत 16 मई को मनाया जा रहा है, इसलिए इस दिन महिलाएं उपवास रखती हैं और बरगद (वट) के पेड़ की पूजा करती हैं. लेकिन इसके पीछे सिर्फ परंपरा नहीं बल्कि एक गहरी पौराणिक कहानी और मान्यता जुड़ी हुई है.

क्या ज्यादा Workout दिल के लिए खतरा है? डॉक्टर ने बताई सच्चाई!

वट सावित्री व्रत की कथा क्या है?

पौराणिक कथा के अनुसार, सनत्कुमार ने भगवान शिव से पूछा कि ऐसा कौन सा व्रत है जो महिलाओं को अखंड सौभाग्य, सुखी जीवन और संतान का आशीर्वाद देता है. तब भगवान शिव ने इस व्रत की कथा बताई. भगवान शिव ने कहा कि बहुत समय पहले मद्र देश में एक राजा रहते थे जिनका नाम अश्वपति था.

वट सावित्री व्रत की कथा क्या है?

वे बहुत ही धर्मात्मा, ज्ञानी, बहादुर और वेद-शास्त्रों के जानकार थे. उनके पास धन, बल और सभी सुख-सुविधाएं थीं, लेकिन उनके जीवन में एक कमी थी उनके कोई संतान नहीं थी. राजा अश्वपति और उनकी पत्नी इस बात से बहुत दुखी रहते थे, संतान प्राप्त करने के लिए उन्होंने भगवान की पूजा, तप और व्रत करना शुरू किया.

वे पूरी श्रद्धा से देवी सावित्री के मंत्रों का जाप करते थे और उनके लिए आहुति भी देते थे, उनकी सच्ची भक्ति और श्रद्धा देखकर देवी सावित्री प्रसन्न हुईं और आगे की कथा में उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाएं घटित हुईं, जो वट सावित्री व्रत की परंपरा का आधार बनीं.

बरगद के पेड़ की पूजा क्यों होती है?

बरगद का पेड़ इस व्रत में बहुत खास माना जाता है, इसके कई कारण हैं:

दीर्घायु का प्रतीक

बरगद का पेड़ बहुत लंबे समय तक जीवित रहता है, इसलिए इसे पति की लंबी उम्र से जोड़ा जाता है.

स्थिरता और मजबूती का संकेत

इसकी जड़ें बहुत गहरी और मजबूत होती हैं, जो परिवार की स्थिरता का प्रतीक मानी जाती हैं.

धार्मिक मान्यता

मान्यता है कि बरगद के पेड़ में त्रिदेव – ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है.

सावित्री की कथा से जुड़ाव

कहानी में इसी पेड़ के नीचे सावित्री ने अपने पति का जीवन वापस पाया था, इसलिए यह पेड़ इस व्रत का मुख्य हिस्सा है.

पूजा कैसे की जाती है?

इस दिन महिलाएं वट वृक्ष के चारों ओर धागा बांधती हैं, जल चढ़ाती हैं और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं, इसके बाद व्रत का समापन किया जाता है.

पूजा कैसे की जाती है?

निष्कर्ष

वट सावित्री व्रत सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह आस्था, प्रेम और वैवाहिक जीवन की मजबूती का प्रतीक है. बरगद का पेड़ इस व्रत में जीवन, स्थिरता और लंबी उम्र का संदेश देता है.

FAQs

Q1. वट सावित्री व्रत क्या है?
यह एक हिंदू व्रत है जो सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे जीवन के लिए करती हैं.

Q2. वट सावित्री व्रत 2026 में कब है?
यह व्रत साल 2026 में 16 मई को मनाया जा रहा है.

Q3. इस दिन किसकी पूजा की जाती है?
इस दिन बरगद (वट) के पेड़ और सावित्री-सत्यवान की पूजा की जाती है.

Q4. बरगद के पेड़ की पूजा क्यों की जाती है?
क्योंकि यह लंबी उम्र, मजबूती और परिवार की स्थिरता का प्रतीक माना जाता है.

Q5. इस व्रत की कहानी क्या है?
सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस दिलाए थे.

इसलिए यह व्रत पति की लंबी उम्र के लिए किया जाता है.

यह भी पढ़े- Bada Mangal 2026: बड़ा मंगल पर क्यों उमड़ती है भक्तों की भारी भीड़? जानें रहस्य