क्या धर्मेंद्र प्रधान अतिमहत्वाकांक्षा के शिकार हो गये हैं?
NCERT controversy: क्या धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी जाने वाली है? क्या धर्मेंद्र प्रधान अतिमहत्वाकांक्षा के शिकार हो गये हैं? चलिए पहले खबर जानिए, सूत्रों के मुबातिक, पीएम नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक में इस विवाद पर नाराजगी जताते हुए पूछा था कि न्यायपालिका में करप्शन पर क्या पढ़ा रहे हैं. इसकी देखरेख कौन कर रहा है. वहीं, शिक्षा मंत्री प्रधान ने कहा कि ये अध्याय तैयार करने वालों के खिलाफ जवाबदेही तय की जाएगी. याद करिए पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद अक्सर सुप्रीम कोर्ट से जजों की नियुक्ति को लेकर उलझते दिखते थे, पूर्व मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड से रिश्ते सुधारने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को खुद उनके घर गणेश पूजा में जाना पड़ा था. तब जाकर रिश्ते सुधरे. क्या NCERT का यह विवाद धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी खतरे में डाल दिया है.
UGC विवाद पर सोशल मीडिया में तमाम अफवाह
UGC विवाद पर सोशल मीडिया पर धर्मेंद्र प्रधान ‘विलेन’ बने हुए हैं. फिर इनके उड़ीसा का सीएम ना बन पाने की कहानी, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की रेस में फेल होने की कहानी और अब NCERT विवाद में सुप्रीम कोर्ट का सख्त रूख.

मैं अफसोस जाहिर करता हूं-धर्मेंद्र प्रधान
इस मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा, ‘हम ज्यूडिशियरी का पूरा सम्मान करते हैं। ज्यूडिशियरी ने जो भी कहा है, हम उसका पूरा पालन करेंगे। जो हुआ है, उससे मैं बहुत दुखी हूं, और मैं अफसोस जाहिर करता हूं। जैसे ही यह मामला मेरे ध्यान में आया, मैंने तुरंत NCERT को संबंधित किताबें वापस लेने का निर्देश दिया ताकि वे आगे सर्कुलेट न हों। उन्हें वापस बुलाने के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं।’
न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश- सुप्रीम कोर्ट
एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े आपत्तिजनक बातों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने इसे न्यायपालिका को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश करार दिया और बाजार से किताब को वापस लेने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी।
न्यायपालिका का खून बह रहा है-सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं?
- सुप्रीम कोर्ट में एनसीईआरटी की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस सुओ मोटो केस में हम माफी मांगते हैं। इस पर सीजेआई ने कहा कि मीडिया में हमारे दोस्तों ने यह नोटिस भेजा और इसमें माफी का एक शब्द नहीं है।
- उन्होंने कहा, ‘यह हमारी संस्थागत जिम्मेदारी है कि हम यह पता लगाएं कि यह किताब में प्रकाशित हुआ था या नहीं। रजिस्ट्रार जनरल को भेजे गए संदेश में संबंधित विभाग इसका बचाव कर रहा था। यह एक गहरी साजिश थी।
- सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि चैप्टर तैयार करने वाले दो लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। वे कभी यूजीसी या किसी मंत्रालय के साथ काम नहीं कर सकेंगे।
- इसके बाद सीजेआई ने कहा, ‘यह तो बहुत आसान होगा और वो बच निकलेंगे। उन्होंने गोली चलाई और न्यायपालिका का खून बह रहा है।’ तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि 32 कॉपी जो बाजार में गई थीं, उन्हें वापस ले लिया गया है और पूरी पुस्तक की समीक्षा की जाएगी।
- इस पर सीजेआई ने टिप्पणी की कि केवल दो लोगों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। यह बहुत आसान होगा और वे बच निकलेंगे। यह पूरी न्यायपालिका को बदनाम करने की चाल है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या पुस्तक की कॉपियां अभी बाजार या ऑनलाइन उपलब्ध हैं। उसे भी जल्द वापस लिया जाए।
- मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ के सामने सीनियर वकील कपिल सिब्बल और डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने यह मुद्दा उठाया। सिब्बल ने कहा कि कक्षा 8 के बच्चों को जुडिशरी में करप्शन के बारे में पढ़ाया जाना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि संस्था के सदस्य होने के नाते वे इससे परेशान हैं।
- मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संतुलन और स्वायत्तता सुनिश्चित की है। ऐसे में किसी एक संवैधानिक संस्था की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की बातें युवाओं और अभिभावकों के मन में बैठ गईं तो न्यायिक संस्थाओं पर से भरोसा कम हो सकता है।
- कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में गहन जांच की जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि इस सामग्री के प्रकाशन के पीछे कौन जिम्मेदार है। वहीं, सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया कि विवादित अध्याय हटाया जाएगा और संशोधित संस्करण दोबारा प्रकाशित किया जाएगा। अदालत ने दोहराया कि न्यायपालिका की साख से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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