Baisakhi Festival: आज देशभर में बैसाखी का पावन पर्व हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है, यह त्योहार खासतौर पर पंजाब और उत्तर भारत में बेहद धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन इसका महत्व पूरे देश के लिए है.
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कैसे शुरू हुई बैसाखी मनाने की परंपरा?
बैसाखी की परंपरा सदियों पुरानी है. मूल रूप से यह एक फसल कटाई का त्योहार है, जब किसान अपनी मेहनत की फसल घर लाते हैं और खुशियां मनाते हैं. खासकर गेहूं की फसल पकने के बाद यह पर्व किसानों के लिए नए साल और समृद्धि का प्रतीक बन जाता है, लेकिन बैसाखी का महत्व सिर्फ कृषि तक सीमित नहीं है. साल 1699 में, सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह ने इसी दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी, यह घटना सिख इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है.
क्यों है बैसाखी खास?
यह सिख नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है, किसानों के लिए नई फसल और समृद्धि का पर्व, धार्मिक और सांस्कृतिक एकता का संदेश देता है.
कैसे मनाया जाता है बैसाखी?
इस दिन लोग सुबह गुरुद्वारों में जाकर अरदास करते हैं, नगर कीर्तन निकाले जाते हैं और भांगड़ा-गिद्धा जैसे पारंपरिक नृत्य किए जाते हैं, घरों में विशेष पकवान बनते हैं और लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं.
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