Kharmas: हिंदू धर्म में खरमास को एक विशेष लेकिन अशुभ अवधि माना जाता है, यह समय साल में दो बार आता है, जब सूर्य धनु (Sagittarius) या मीन (Pisces) राशि में प्रवेश करता है. इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों को करने से परहेज किया जाता है.
हिन्दी भाषा सरलता, स्पष्टता और मधुरता के कारण सर्वश्रेष्ठ : मधु खन्ना
क्या होता है खरमास?
खरमास को ‘मलमास’ भी कहा जाता है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में शुभ ग्रहों का प्रभाव कमजोर हो जाता है, जिससे नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत टाल दी जाती है. हालांकि, यह समय पूजा-पाठ, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए बहुत शुभ माना जाता है.
क्यों नहीं होते शुभ काम?
ग्रहों की स्थिति: सूर्य के विशेष राशियों में होने के कारण मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल समय नहीं माना जाता.
धार्मिक मान्यता: मान्यता है कि इस दौरान किए गए शुभ कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं.
परंपरा: सदियों से चली आ रही परंपराओं के अनुसार इस समय विवाह और अन्य समारोह टाल दिए जाते हैं.
क्या करना चाहिए खरमास में?
भगवान की पूजा और भजन-कीर्तन, दान-पुण्य और सेवा कार्य, तीर्थ यात्रा और धार्मिक अनुष्ठान.
क्या नहीं करना चाहिए?
विवाह और सगाई, गृह प्रवेश, नए व्यापार की शुरुआत खरमास भले ही मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त न माना जाए, लेकिन यह समय आध्यात्मिक उन्नति और आत्मचिंतन के लिए बेहद खास होता है, इसके समाप्त होते ही फिर से शुभ कार्यों का सिलसिला शुरू हो जाता है और घर-घर में खुशियों का माहौल लौट आता है.
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