Budh Pradosh Vrat Katha 2026: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का अत्यंत प्रभावशाली माध्यम माना जाता है. पंचांग के अनुसार आज यानी 15 अप्रैल को प्रदोष व्रत रखा जाएगा. जब यह व्रत बुधवार के दिन पड़ता है, तो इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है. इस दिन शिव-पार्वती की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है.
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क्या है बुध प्रदोष व्रत की कथा?
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय की बात है जब एक गरीब ब्राह्मण परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था. परिवार की एकमात्र आशा उसका पुत्र था, जो रोजगार की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था. एक दिन उसे किसी ज्ञानी व्यक्ति से बुध प्रदोष व्रत के महत्व के बारे में पता चला, उसने पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ यह व्रत करना शुरू किया. हर प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा कर बेलपत्र, जल और धूप-दीप अर्पित करने लगा. कुछ समय बाद उसकी किस्मत बदलने लगी उसे अच्छा काम मिला और घर की आर्थिक स्थिति सुधर गई.
क्या है इसका महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बुध प्रदोष व्रत रखने से बुद्धि, व्यापार और करियर से जुड़े सभी कार्यों में सफलता मिलती है. साथ ही, भगवान शिव की कृपा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं.
कैसे करें पूजा?
इस दिन सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें और शाम के समय शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धूप अर्पित करें, “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है. अगर आप भी जीवन में सकारात्मक बदलाव चाहते हैं, तो बुध प्रदोष व्रत को पूरी श्रद्धा के साथ जरूर करें. यह व्रत न केवल आपकी मनोकामनाएं पूरी करता है, बल्कि जीवन में खुशहाली भी लाता है.
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