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BadrinathDham: बद्रीनाथ को ‘धरती का वैकुंठ’ क्यों कहा जाता है?

बद्रीनाथ धाम का भव्य दृश्य, जहां भगवान विष्णु के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी हुई है.

Badrinath Dham: उत्तराखंड की पवित्र वादियों में एक बार फिर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है, बद्रीनाथ धाम भारत के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है. बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा 2026 ने अब पूरी रफ्तार पकड़ ली है, इससे पहले यमुनोत्री धाम और गंगोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे. वहीं केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल को और बद्रीनाथ मंदिर के कपाट आज यानी 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं, इसके साथ ही चारधाम यात्रा पूरी तरह से शुरू हो गई है और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है.

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क्यों कहा जाता है ‘धरती का वैकुंठ’?
चारधाम यात्रा में बद्रीनाथ का विशेष स्थान है, इसे सबसे प्रमुख धाम माना जाता है, यहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. वहीं बद्रीनाथ धाम में भगवान विष्णु की पूजा होती है, मान्यता है कि विष्णु जी का असली धाम वैकुण्ठ लोक है, और बद्रीनाथ को पृथ्वी पर उनका ही स्वरूप माना जाता है. इसलिए इसे “धरती का वैकुण्ठ” कहा जाता है. हिंदू धर्म में कहा जाता है कि जो व्यक्ति अपने जीवन में बद्रीनाथ के दर्शन करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है, जो वैकुण्ठ जाने के समान माना जाता है. बद्रीनाथ धाम का मंदिर वर्ष में केवल छह महीनों के लिए ही खुला रहता है, जो आमतौर पर अप्रैल के अंत से लेकर नवंबर की शुरुआत तक.

बद्रीनाथ में भगवान किस रूप में विराजमान हैं?
बद्रीनाथ मंदिर, जिसे बद्रीनारायण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. बद्रीनाथ मंदिर में भगवान विष्णु के ‘बद्रीविशाल’ या ‘बद्रीनारायण’ रूप की मूर्ति स्थापित है, जो शालिग्राम शिला से बनी लगभग एक मीटर ऊंची ध्यान मुद्रा में है. इस मंदिर के अंदर भगवान बद्रीनाथ के साथ कई अन्य देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित हैं, यहां भगवान विष्णु के नर-नारायण रूप की पूजा की जाती है. बद्रीनाथ मंदिर पंच बद्री कहलाने वाले पांच संबंधित तीर्थों में से एक है, जो विष्णु की पूजा के लिए समर्पित हैं.

बद्रीनाथ धाम की स्थापना
बद्रीनाथ धाम भारत के उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले के बद्रीनाथ शहर में स्थित है, इस मंदिर की स्थापना आदि शंकराचार्य ने नौवीं शताब्दी में बद्रीनाथ को एक तीर्थस्थल के रूप में स्थापित किया था. वहीं बद्रीनाथ धाम अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है, यह भगवान विष्णु को समर्पित है और चारधाम यात्रा का अहम हिस्सा माना जाता है. बद्रीनाथ मंदिर भारत के सबसे अधिक देखे जाने वाले तीर्थ स्थलों में से एक है.

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FAQS

1. बद्रीनाथ धाम को ‘धरती का वैकुंठ’ क्यों कहा जाता है?
मान्यता है कि यह स्थान भगवान विष्णु का निवास स्थल है. जैसे वैकुंठ में विष्णु जी रहते हैं, वैसे ही बद्रीनाथ को उनका धरती पर रूप माना जाता है.

2. बद्रीनाथ धाम का धार्मिक महत्व क्या है?
यह हिंदू धर्म के चार धामों में से एक है, यहाँ दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति और पापों से मुक्ति मिलने की मान्यता है.

3. बद्रीनाथ में किस भगवान की पूजा होती है?
यहाँ मुख्य रूप से भगवान विष्णु की पूजा होती है, जिन्हें बद्रीनारायण के रूप में जाना जाता है।

4. बद्रीनाथ धाम साल में कुछ महीनों के लिए ही क्यों खुलता है?
यह स्थान हिमालय में स्थित है, जहां सर्दियों में भारी बर्फबारी होती है, इसलिए कपाट केवल गर्मियों में ही खोले जाते हैं.

5. बद्रीनाथ से जुड़ी प्रमुख पौराणिक कथा क्या है?
कहा जाता है कि भगवान विष्णु यहां तपस्या कर रहे थे और माता लक्ष्मी ने उन्हें ठंड से बचाने के लिए ‘बद्री वृक्ष’ का रूप लिया, तभी से यह स्थान बद्रीनाथ कहलाया.