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क्या ललन सिंह के इशारे पर विजय सिन्हा का पर कतर रहे हैं सम्राट चौधरी?

सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि सम्राट चौधरी के लिए बीजेपी में पैरवी जेडीयू से कैबिनेट मंत्री ललन सिंह ने किया है. ललन सिंह के प्रति सम्राट चौधरी समर्पित रहे हैं. अब सवाल यह है कि क्या ललन सिंह के इशारे पर पूर्व मुख्यमंत्री विजय सिन्हा का सियासी पर कतर रहे हैं बिहार के सीएम सम्राट चौधरी?

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राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी के बीच बहुत की बारीक लकीर होती है. कभी कभी यह लकीर इतनी पतली होती है कि यह पता ही नहीं चला कि कब किसी की दोस्ती दुश्मनी की दीवार पर चिपक गई या फिर कब दो राजनीतिक दुश्मन गलबहियां की गिरफ्त में आ गए. केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह और उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा कब दोस्त बन गए या कि फिर कब दुश्मन बन जायेंगे पता नहीं.

बिहार के नए सीएम सम्राट चौधरी ने अपने पूर्व उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के बड़े फैसले को पलट दिया है. सम्राट चौधरी की सरकार ने लंबे समय से हड़ताल पर डटे राजस्व कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है. राजस्व कर्मचारियों का सस्पेंशन अब रद्द किया जाएगा.

बता दें कि 14 अप्रैल तक राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का कार्यभार देख रहे पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने इन हड़ताली राजस्व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया था. बता दें कि बिहार के डिप्टी सीएम और राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने हड़ताल पर गए 224 राजस्व कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया था. ये कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर 11 फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे.

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इसके बाद नौ मार्च से सीओ और राजस्व अधिकारी भी हड़ताल पर चले गए. उनके खिलाफ भी 45 से ज्यादा निलंबन हुए. वहीं, अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सभी कर्मचारियों का निलंबन वापस ले लिया है और उन्हें जल्द से जल्द बहाल करने का आदेश दिया है. आदेश में कहा गया है कि 11 फरवरी से 19 अप्रैल के बीच निलंबित किए गए कर्मियों की बहाली जल्द से जल्द शुरू की जाए.

दोबारा परीक्षा देने की अनुमति वाला आदेश वापस

इसके साथ ही बिहार सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को सिर्फ एक बार परीक्षा देने की अनुमति वाला आदेश वापस ले लिया है. मौजूदा एनडीए सरकार ने अपने ही पूर्व के आदेश को पलटते हुए वह सख्त प्रावधान वापस ले लिया है. जिस समय विभाग ने आदेश पारित किया था उस समय मंत्री और डिप्टी CM विजय सिन्हा थे.

सम्राट सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है व इस आदेश को निरस्त करने का निर्देश दिया. इस बाबत नगर विकास विभाग द्वारा लेटर भी जारी किया गया है. वहीं 6 अप्रैल को नगर विकास विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया था कि कोई भी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी अपने सेवाकाल के दौरान केवल एक बार ही किसी विभागीय या प्रतियोगी परीक्षा में शामिल हो सकता है.

आदेश में क्या कहा गया?

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया था कि यदि कोई कर्मचारी इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसे नौकरी छोड़नी पड़ सकती है. इस आदेश से कर्मचारियों के बीच भारी आक्रोश था. कई कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए सरकार से इसे वापस लेने की मांग की थी.

फैसले से कर्मचारियों में खुशी की लहर

कर्मचारियों का कहना था कि यह फैसला उनके करियर ग्रोथ को रोकने वाला है और इससे उनकी आगे बढ़ने की संभावनाएं खत्म हो जाएंगी. अब सरकारी कर्मी नौकरी में रहते हुए भी अपनी योग्यता बढ़ाने और अन्य ऊंचे पदों के लिए आयोजित होने वाली परीक्षाओं में भाग ले सकेंगे. सरकार द्वारा फैसले वापस लेने से कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है.