ParentingTips: आज के दौर में ज्यादातर माता-पिता बच्चों को हर समय व्यस्त रखने की कोशिश करते हैं—कभी मोबाइल, कभी टीवी, तो कभी एक्टिविटी क्लास, लेकिन बच्चों का कभी-कभी ‘बोर’ होना भी उनकी मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए जरूरी है.
KnowledgeIsTips: क्या आप जानते हैं भारत का ‘बनाना कैपिटल’ कौन सा शहर है?
बच्चे का बोर होना क्यों जरूरी
क्रिएटिविटी बढ़ाने में मददगार– जब बच्चे के पास करने को कुछ तय नहीं होता, तो वह खुद से नया सोचने की कोशिश करता है, यही बोरियत उसकी कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता को बढ़ाती है. खिलौनों के बिना भी बच्चे अपनी दुनिया खुद बना लेते हैं.
समस्या सुलझाने की क्षमता होती है मजबूत– बोर होने पर बच्चा खुद से कोई गतिविधि ढूंढता है, इससे उसकी समस्या सुलझाने की क्षमता विकसित होती है और वह आत्मनिर्भर बनता है.
भावनात्मक संतुलन सीखता है– हर समय मनोरंजन मिलने से बच्चे धैर्य कम सीख पाते हैं, थोड़ी बोरियत उन्हें इंतजार करना और अपनी भावनाओं को संभालना सिखाती है.
स्क्रीन टाइम में कमी– मोबाइल और टीवी की आदत बच्चों की आंखों और दिमाग पर असर डाल सकती है, बोरियत उन्हें स्क्रीन से दूर रहकर किताब पढ़ने, चित्र बनाने या बाहर खेलने के लिए प्रेरित कर सकती है.
पेरेंट्स क्या करें?
हर समय बच्चे को नई गतिविधि देने से बचें, उसे खुद से खेलने या सोचने का समय दें, सुरक्षित माहौल में स्वतंत्रता दें.
ये भी पढ़े-RelationshipTips: कमाने की मजबूरी में खो न दें अपने रिश्ते, ये 3 टिप्स अपनाएं


























