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Kedarnath Dham: बाबा केदारनाथ धाम के कपाट खुलते ही क्यों उमड़ते हैं लाखों भक्त? जानिए

केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने के बाद दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ और सजा हुआ मंदिर

Kedarnath Dham: उत्तराखंड की पावन वादियों में एक बार फिर आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है. पवित्र अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर सबसे पहले गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए, जिसके साथ ही चारधाम यात्रा की औपचारिक शुरुआत हो गई. इसके बाद आज भक्ति और उत्साह के बीच केदारनाथ मंदिर के कपाट भी पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ खोल दिए गए. मंदिर को भव्य फूलों से सजाया गया और “हर हर महादेव” के जयकारों से पूरा धाम गूंज उठा.

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अब चारधाम यात्रा का अगला और अंतिम पड़ाव बद्रीनाथ मंदिर है, जिसके कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे, इसके साथ ही चारों धाम गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ पूरी तरह से भक्तों के दर्शन के लिए तैयार हो जाएंगे. हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा का हिस्सा बनने के लिए उत्तराखंड पहुंच रहे हैं, जहां आस्था, प्रकृति और आध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिलता है.

कपाट खुलते ही क्यों उमड़ते हैं लाखों भक्त?
कपाट खुलते ही केदारनाथ मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है, इसकी वजह सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि गहरी आस्था है. वहीं 6 महीने तक बर्फ से ढका रहने वाला यह धाम जैसे ही खुलता है, भक्तों को बाबा के साक्षात दर्शन का पहला मौका मिलता है. माना जाता है कि यहां आकर भगवान शिव के दर्शन करने से पापों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

केदारनाथ धाम चारधाम यात्रा का भी अहम हिस्सा है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां कठिन यात्रा कर बाबा के दर्शन करने पहुंचते हैं. बर्फ से ढका यह क्षेत्र साल के लगभग 6 महीने बंद रहता है, इसलिए कपाट खुलते ही यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है.

आस्था और मोक्ष की मान्यता
हिंदू धर्म में चार धाम यात्रा का विशेष महत्व है, वहीं केदारनाथ मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक अत्यंत पवित्र धाम है. हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच स्थित यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि आध्यात्मिक शक्ति का भी प्रतीक माना जाता है.

केदारनाथ धाम का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व
केदारनाथ मंदिर का महत्व सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि पौराणिक कथाओं से भी गहराई से जुड़ा है, मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की शरण में आए थे. कहते हैं कि शिव जी उनसे नाराज थे और उनसे बचने के लिए अलग-अलग रूप धारण कर छिपते रहे.

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