ChandraGrahan2026: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण आज लगने जा रहा है और इसके साथ ही सूतक काल भी शुरू हो चुका है. भारतीय धार्मिक परंपरा में सूतक काल को शुभ कार्यों से परहेज करने का समय माना जाता है, इस दौरान घर में बने भोजन और पानी में तुलसी के पत्ते डालने की प्रथा है. लेकिन ग्रहण समाप्ति के बाद इन तुलसी पत्तों का क्या करें, इसे लेकर अक्सर लोगों में भ्रम रहता है.
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सूतक काल और तुलसी का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि सूतक काल में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, इसलिए भोजन और पानी में तुलसी डालकर उसे शुद्ध रखने का काम किया जाता है. तुलसी के पत्ते ग्रहण के दौरान भोजन और पानी को नकारात्मक प्रभाव से बचाते हैं.
सूतक काल में डाली तुलसी का सही तरीका
ग्रहण समाप्ति के बाद निकालें: सूतक काल के दौरान भोजन या पानी में डाली गई तुलसी ग्रहण खत्म होने के बाद निकालकर किसी सुरक्षित स्थान पर रखें.
नहीं खाना या पीना: ग्रहण के समय डाले गए तुलसी वाले भोजन या पानी को ग्रहण समाप्ति से पहले न उपयोग करें.
स्नान और शुद्धिकरण के बाद उपयोग करें: ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और साफ-सफाई कर भोजन या पानी का उपयोग किया जा सकता है.
दान करने की प्रथा: कुछ परिवार ग्रहण में डाली तुलसी को सूतक समाप्ति के बाद दान कर देते हैं, इसे पुण्य का कार्य माना जाता है.
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
भारतीय संस्कृति में ग्रहण को आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्व दिया जाता है. ग्रहण के दौरान तुलसी डालने की परंपरा घर और भोजन को शुद्ध रखने और नकारात्मक प्रभाव से बचाने का प्रतीक है.
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