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Delimitation Bill 2026: परिसीमन विधेयक पर BJP को मिल सकती है राहत? सुप्रिया सुले के बयान से बदले सियासी समीकरण

Delimitation Bill 2026:

Delimitation Bill 2026: परिसीमन विधेयक 2026 को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है।

माना जा रहा है कि केंद्र सरकार इसे आगामी मानसून सत्र में दोबारा संसद में पेश कर सकती है।

इस बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और लोकसभा सांसद सुप्रिया

सुले के ताजा बयान ने राजनीतिक चर्चाओं को नई दिशा दे दी है।

सुप्रिया सुले ने संकेत दिए हैं कि अगर विधेयक में कुछ अहम प्रावधान शामिल किए जाते हैं,

तो उनकी पार्टी इस पर सकारात्मक रुख अपना सकती है।

हालांकि उन्होंने साफ किया कि अंतिम फैसला विधेयक का पूरा मसौदा देखने के बाद ही लिया जाएगा।

सुप्रिया सुले ने क्या कहा?

मीडिया से बातचीत में सुप्रिया सुले ने कहा कि अभी तक परिसीमन विधेयक उनकी पार्टी के पास नहीं पहुंचा है।

ऐसे में बिना दस्तावेज देखे किसी भी तरह का फैसला लेना उचित नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि अगर परिसीमन केवल जनसंख्या के आधार पर किया जाता है,

तो इसका सबसे ज्यादा असर दक्षिण भारत के राज्यों पर पड़ेगा।

उनकी राय में ऐसा होना उन राज्यों के साथ न्यायसंगत नहीं होगा।

Delimitation Bill 2026: सुप्रिया सुले

लोकसभा सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव पर क्या बोलीं?

सुप्रिया सुले ने कहा कि यदि नए विधेयक में पूरे देश में लोकसभा सीटों की संख्या करीब 50 प्रतिशत बढ़ाने का प्रावधान रखा जाता है,

तो उनकी पार्टी इस पर सकारात्मक विचार कर सकती है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर अंतिम फैसला INDIA गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों से चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।

अमित शाह की बैठक का भी किया जिक्र

सुप्रिया सुले ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक के दौरान भी इस विकल्प पर चर्चा हुई थी।

उनके मुताबिक, केवल NCP (शरदचंद्र पवार) ही नहीं, बल्कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) समेत

कुछ अन्य विपक्षी दलों ने भी इस प्रस्ताव को लेकर सकारात्मक संकेत दिए थे।

हालांकि सभी दल अंतिम विधेयक सामने आने के बाद ही अपना आधिकारिक रुख तय करेंगे।

अप्रैल में सरकार ने क्या कहा था?

इस साल अप्रैल में संसद के विशेष सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने परिसीमन विधेयक 2026,

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किए थे।

उस दौरान लोकसभा में चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि परिसीमन की प्रक्रिया में किसी भी

राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा खासकर दक्षिण भारत के राज्यों के साथ।

उन्होंने यह भी बताया था कि वर्तमान में दक्षिण भारत से लोकसभा के 129 सांसद हैं।

प्रस्तावित बदलाव लागू होने के बाद यह संख्या बढ़कर 195 हो जाएगी।

उनके अनुसार, यह विधेयक दक्षिणी राज्यों के हितों को कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत करेगा।

विपक्ष क्यों जता रहा है आपत्ति?

दूसरी ओर, विपक्षी INDIA गठबंधन लगातार इस विधेयक का विरोध करता रहा है।

विपक्ष का कहना है कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी

राजनीतिक दल को इसका फायदा पहुंचाने की गुंजाइश नहीं रहनी चाहिए।

वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि पूरी प्रक्रिया संविधान और कानून के दायरे में होगी तथा सभी राज्यों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।

अब आगे क्या?

अगर सरकार मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक दोबारा पेश करती है, तो संसद में इस पर जोरदार बहस देखने को मिल सकती है।

फिलहाल सुप्रिया सुले के बयान ने इतना जरूर संकेत दिया है कि विपक्ष के कुछ दल सीधे विरोध की बजाय विधेयक की अंतिम रूपरेखा का इंतजार कर रहे हैं।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार अंतिम मसौदे में क्या बदलाव करती है और विपक्ष उसका किस तरह जवाब देता है।

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