कप्तानगंज (कुशीनगर) | रिपोर्ट: गिरजेश गोविन्द राव
रामकोला मिनी स्टेडियम : कुशीनगर जिले की नगर पंचायत रामकोला स्थित कांशीराम मिनी स्टेडियम इन दिनों अपनी बदहाली को लेकर चर्चा में है।
कभी खेल प्रतिभाओं को निखारने के उद्देश्य से बनाए गए इस स्टेडियम की मौजूदा स्थिति स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
मैदान में जलभराव, गंदगी और अव्यवस्था के कारण न केवल खिलाड़ी परेशान हैं बल्कि इसी परिसर में संचालित
जूनियर हाई स्कूल के छात्र भी प्रभावित हो रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चुनावी मंचों से स्टेडियम के विकास और कायाकल्प के कई वादे किए गए थे,
लेकिन आज तक हालात में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं देता।
स्कूल जाने वाले बच्चों को रोज झेलनी पड़ रही परेशानी
स्टेडियम परिसर के भीतर जूनियर हाई स्कूल संचालित होने के कारण हर दिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं इसी रास्ते से होकर स्कूल पहुंचते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार मैदान में लंबे समय से जलभराव बना हुआ है। गंदे पानी, कीचड़ और मच्छरों के कारण बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सफाई और जलनिकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
₹18 लाख की मिट्टी पर उठ रहे सवाल
रामकोला मिनी स्टेडियम : स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि नगर पंचायत अध्यक्ष सुनीता चौधरी के कार्यकाल में स्टेडियम की भराई
और सुंदरीकरण के लिए करीब 18 लाख रुपये की लागत से मिट्टी डलवाने का दावा किया गया था।
हालांकि, लोगों का कहना है कि मौजूदा स्थिति देखकर यह समझना मुश्किल है कि भराई का कार्य किस स्तर पर हुआ।
मैदान आज भी जलभराव और दलदल की स्थिति में है।
इसी को लेकर स्थानीय लोगों ने कई सवाल उठाए हैं—
- क्या स्टेडियम में भराई का कार्य पूरी गुणवत्ता के साथ किया गया?
- यदि काम हुआ, तो मैदान की स्थिति अब भी इतनी खराब क्यों है?
- क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी?
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने पर समाचार को अपडेट किया जाएगा।
विकास के वादों पर भी उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने एक कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र में स्टेडियम के विकास का आश्वासन दिया था।
लोगों का यह भी कहना है कि क्षेत्रीय सांसद और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में कई घोषणाएं हुई थीं,
लेकिन अब तक अपेक्षित कार्य दिखाई नहीं देता।
नागरिकों का आरोप है कि नगर पंचायत द्वारा शहर के जलनिकासी का पानी स्टेडियम की ओर मोड़ दिए जाने से समस्या और बढ़ गई है।
जनता चाहती है समाधान
रामकोला के युवाओं, खिलाड़ियों और अभिभावकों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की जरूरत है।
उनका कहना है कि स्टेडियम की मरम्मत, जलनिकासी व्यवस्था और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए
और दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाए।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से प्रमुख मांगें
- कांशीराम मिनी स्टेडियम से तत्काल जलभराव हटाया जाए।
- बच्चों के लिए सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था की जाए।
- स्टेडियम का पुनर्विकास कर खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
- ₹18 लाख की भराई से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
निष्कर्ष
रामकोला का कांशीराम मिनी स्टेडियम आज विकास और रखरखाव से जुड़े कई सवालों के केंद्र में है।
एक ओर खिलाड़ी बेहतर सुविधाओं की उम्मीद लगाए बैठे हैं, तो दूसरी ओर स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा
और स्वास्थ्य भी चिंता का विषय बना हुआ है।
अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
FAQ
Q1. रामकोला मिनी स्टेडियम कहां स्थित है?
यह कुशीनगर जिले की नगर पंचायत रामकोला में स्थित कांशीराम मिनी स्टेडियम है।
Q2. स्टेडियम की बदहाली का मुख्य कारण क्या बताया जा रहा है?
स्थानीय लोगों के अनुसार जलभराव, गंदगी और रखरखाव की कमी इसकी प्रमुख वजह है।
Q3. ₹18 लाख की मिट्टी का मामला क्या है?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि स्टेडियम की भराई के लिए ₹18 लाख खर्च होने का दावा किया गया, लेकिन मैदान की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
Q4. इस समस्या से सबसे अधिक कौन प्रभावित हो रहा है?
खिलाड़ियों के साथ-साथ स्टेडियम परिसर में संचालित जूनियर हाई स्कूल के छात्र-छात्राएं भी प्रभावित हो रहे हैं।
Q5. स्थानीय लोगों की क्या मांग है?
वे स्टेडियम की मरम्मत, जलनिकासी व्यवस्था, बच्चों की सुरक्षा और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।


























