US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है।
मंगलवार (14 जुलाई) को अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की।
दूसरी ओर, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा करते हुए अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही।
इस बढ़ते टकराव का असर केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है|
जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और महंगाई को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।
अमेरिका का दावा- पांच घंटे तक चला ऑपरेशन
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, 13 जुलाई की रात ईरान के खिलाफ लगभग पांच घंटे तक सैन्य अभियान चलाया गया।
अमेरिका का दावा है कि इस दौरान बुशेहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास
सहित कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इस अभियान का उद्देश्य ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल लॉन्च साइट,
ड्रोन बेस और नौसैनिक क्षमताओं को कमजोर करना था।
अमेरिका ने यह भी कहा कि फिलहाल मध्य पूर्व में उसके 50,000 से अधिक सैनिक तैनात हैं और वे हाई अलर्ट पर हैं।
ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का किया दावा
वहीं, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने बहरीन स्थित अल-जुफैर
में अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया।
IRGC के अनुसार, हमले में हथियार भंडारण केंद्र, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम और अमेरिकी सैनिकों से जुड़ी
एक इमारत को लक्ष्य बनाया गया। इसके अलावा, ईरान ने एक अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को मार गिराने का भी दावा किया है।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
तेल बाजार पर दिखा युद्ध का असर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी देखने को मिला।
रिपोर्टों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड करीब 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
तेल की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव लंबा खिंचता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिका-ईरान युद्ध की 10 बड़ी बातें
- अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर पांच घंटे तक ऑपरेशन चलाने का दावा किया।
- बुशेहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास को निशाना बनाए जाने की बात कही गई।
- अमेरिकी सेना ने मिसाइल, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम को लक्ष्य बनाने का दावा किया।
- मध्य पूर्व में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक हाई अलर्ट पर हैं।
- IRGC ने बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर जवाबी हमले का दावा किया।
- ईरान ने एक अमेरिकी MQ-1 ड्रोन मार गिराने की भी बात कही।
- हॉर्मुज क्षेत्र में तेल टैंकरों पर हमलों को लेकर तनाव और बढ़ गया है।
- संयुक्त राष्ट्र में भी दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
- युद्ध की आशंका से वैश्विक तेल कीमतों में तेजी दर्ज की गई।
- समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसका असर पड़ सकता है।
क्यों बढ़ा फिर तनाव?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिशें हुई थीं।
हालांकि, हॉर्मुज क्षेत्र में जहाजों पर हुए हमलों के बाद हालात फिर बिगड़ गए।
इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से सैन्य कार्रवाई के दावे सामने आए और तनाव एक बार फिर बढ़ गया।
निष्कर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव पूरी दुनिया की नजर में है।
दोनों देशों की ओर से लगातार बड़े दावे किए जा रहे हैं, जबकि क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर भी दिखने लगा है।
आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका और दोनों देशों के अगले कदम इस संकट की दिशा तय करेंगे।





















