आजकल रिश्तों में एक आम समस्या देखने को मिलती है जिसे fear of losing partner कहा जाता है. यह डर तब होता है जब इंसान अपने पार्टनर को बहुत ज्यादा खोने लगता है और उसे हमेशा यही चिंता रहती है कि कहीं रिश्ता टूट न जाए. शुरुआत में यह fear of losing partner सामान्य लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यही भावना रिश्ते में insecurity, overthinking और तनाव पैदा करके उसे toxic बना सकती है.
पार्टनर को खोने का डर क्या होता है?
कई बार किसी व्यक्ति के पिछले अनुभव, जैसे धोखा, बेवफाई या रिजेक्शन की वजह से उसके मन में यह डर बैठ जाता है कि उसे छोड़ दिया जाएगा. इसी कारण वह अपने पार्टनर पर जरूरत से ज्यादा निर्भर होने लगता है, शुरुआत में यह व्यवहार सामान्य लगता है जैसे वह ज्यादा ध्यान देता है.

- बार-बार मैसेज करता है या हर बात पर कन्फर्मेशन मांगता है.
- लेकिन धीरे-धीरे स्थिति बदलने लगती है.
- यह आदत कंट्रोल करने और चिंता बढ़ाने लगती है.
- फिर रिश्ता तनावपूर्ण महसूस होने लगता है.
कब पार्टनर को खोने का डर toxic बनने लगता है?
जब डर बहुत बढ़ जाता है और trust खत्म होने लगता है, तब रिश्ता बदलने लगता है.
- इस समय इंसान बार-बार अपने पार्टनर को चेक करता है कि वो कहाँ है.
- वह बार-बार कॉल और मैसेज करने लगता है.
- कभी-कभी बिना किसी वजह के भी शक करने लगता है.
- इसके साथ ही वह अपने पार्टनर की personal space भी कम कर देता है.
- और वह हर बात पर बार-बार भरोसा या reassurance मांगता है.
- इस वजह से रिश्ता प्यार से ज्यादा एक दबाव जैसा महसूस होने लगता है.
पार्टनर को खोने के डर का रिश्ते पर क्या असर पड़ता है?
जब किसी पर लगातार शक किया जाता है या हर बात पर नजर रखी जाती है, तो वह धीरे-धीरे थकने लगता है. उसे ऐसा महसूस होता है कि उसकी आजादी कम हो रही है, इसके बाद रिश्ते में दूरी आने लगती है. पहले जहां नजदीकी थी, वहां अब तनाव बढ़ जाता है. सबसे बड़ी बात यह है कि जिस डर से रिश्ता बचाने की कोशिश हो रही थी, वही डर धीरे-धीरे रिश्ते को कमजोर करने लगता है और कभी-कभी टूटने की वजह भी बन जाता है.
रिश्ता कैसे खराब होने लगता है?
शुरुआत में जो डर प्यार जैसा लगता है, वही धीरे-धीरे रिश्ते को बदल देता है:

- सबसे पहले यह लड़ाई बढ़ा देता है.
- फिर धीरे-धीरे भरोसा कम होने लगता है.
- उसके बाद emotional pressure बढ़ जाता है और आखिर में दूरी बन जाती है.
- कई बार पार्टनर इस दबाव से थककर सच में दूर जाने लगता है.
- इससे डर और भी बढ़ जाता है, और एक toxic cycle बन जाता है.
इसे कैसे ठीक किया जा सकता है?
सबसे पहले self-confidence पर काम करना जरूरी है, साथ ही हर बात को overthink करना कम करना चाहिए. इसके अलावा अपने hobbies और अपनी life को भी समय देना चाहिए, फिर open communication रखना बहुत मदद करता है और अगर जरूरत हो तो counseling लेना भी सही कदम है.

























