West Bengal: TMC, BJP POLITICS: पश्चिम बंगाल के सियासी महाभारत में बीजेपी ने ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) को हराकर जीत की पटकथा लिख दी है. इसके साथ ही पश्चिम बंगाल की तबीयत देखकर मशहूर शायर मुनव्वर राना के शेर की याद आ रही है. ‘सियासत से अदब की दोस्ती बेमेल लगती है, कभी देखा है पत्थर पे भी कोई बेल लगती है’. पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री से पूर्व मुख्यमंत्री बनने के सफर को ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) जैसे जटिल बनाया यह स्वच्छ, सरल, व्यवस्था परिवर्तन के सियासी परंपरा में दाग है.
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सियासत में आपके समझदारी भरे कदम ही आपकी छवि गढ़ते हैं. छवि राजनीतिक व्याकरण है. यदि सही व्याकरण हो तो गद्य भी पद्य जैसा सुरीला हो सकता है. पश्चिम बंगाल के लेफ्ट के हिंसक सरकार से लड़ते लड़ते ममता बनर्जी इतनी लड़ाकू हो गईं कि वह जनफैसला को सहर्ष स्वीकार करके सत्ता हस्तानांतरण नहीं कीं. इसके साथ ही उपर से कोढ़ में खाज की तरह बंगाल से आ रही हिंसक झड़प भी टीएमसी( TMC) की छवि को धूमिल कर रही है.
“सत्ता भ्रष्ट करती है, और पूर्ण सत्ता पूर्ण रूप से भ्रष्ट कर देती है”
यह एक बहुत पुरानी और प्रसिद्ध कहावत है: “सत्ता भ्रष्ट करती है, और पूर्ण सत्ता पूर्ण रूप से भ्रष्ट कर देती है” (Power tends to corrupt, and absolute power corrupts absolutely). सोचिए जवानी से लेकर बुढापे तक जिसके आगे अफसरों की फौज दासों की तरह पलक झपकने का इंतजार करती रही हो. जैसे राजा को कोई कष्ट हो, तो वे पलक पावड़े बिछा दें. पूरी पार्टी ममता बनर्जी का निर्गुण पाठ करती रही है. उस ताकत का नशा उतरने लगे तो क्या वह ‘सियासी पहलवान’ सत्ता की चाबी यूं ही जाने देगा.
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Mamta Banerjee के हार की वजह
मेरा अपना अनुभव जो करीब दस साल से पश्चिम बंगाल के अलग अलग जिलों में जाकर हुआ था. मेरा यह सफर चुनाव के वक्त का नहीं था. ग्राउंड पर तुष्टिकरण का बजबजाता चेहरा टीएमसी का स्पष्ट झलकता था. इसके साथ ही सिंडिकेट की गुंडई लालू यादव के बिहार की याद दिलाती थी. जनता के ‘उघड़े जख्मों’ पर ‘लाल दवा’ लगा रही थी ममता सरकार, यह सच है. लेकिन तुष्टिकरण और गुंडई से आम जनता में अब विद्रोह दिख रहा था. अपने वोटबैंक को सहेजना हर दल का स्वभाविक कार्य है लेकिन 21वीं सदी में आम जनता पेट की भूख से बाहर निकल चुकी है उसे उसके स्वभाविक हक से बेदखली परेशान करती है. टीएमसी के नेता और कार्यकर्ता से आम जनता त्रस्त थी. यह अब प्रामाणिक हो चुका है.
बिदाई के बेला पर ममता बनर्जी ने कुर्सी ना छोड़ने का स्टंट करके अपने स्वच्छ और धवल सफेद साड़ी पर दाग तो लगा ही दिखा है. भद्रजन की नगरी इसे कैसे देखेगा यह भविष्य के गर्भ में है.























