Garud Puran Rule: हिंदू धर्म में मृत्यु और अंतिम संस्कार से जुड़े कई नियम और परंपराएं हैं, जिनका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में मिलता है, इनमें गरुड़ पुराण का विशेष महत्व है. इस ग्रंथ में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा और अंतिम संस्कार से जुड़े कई नियम बताए गए हैं, इन्हीं में से एक सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है आखिर छोटे बच्चों का दाह संस्कार क्यों नहीं किया जाता?
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क्या कहता है गरुड़ पुराण?
गरुड़ पुराण के अनुसार, छोटे बच्चों को निष्पाप और पवित्र आत्मा माना जाता है, कहा जाता है कि वे संसार के पाप और मोह-माया से दूर होते हैं, इसलिए उनकी आत्मा पर किसी प्रकार का कर्म बंधन नहीं होता.
दाह संस्कार क्यों नहीं किया जाता?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटे बच्चों का दाह संस्कार करने के बजाय उन्हें दफनाया (भूमि में समर्पित) किया जाता है, इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि बच्चों की आत्मा को शुद्ध और सीधे ईश्वर के पास जाने वाला माना जाता है, उन्हें मोक्ष प्राप्त करने के लिए किसी विशेष विधि या अग्नि संस्कार की आवश्यकता नहीं होती. दाह संस्कार मुख्य रूप से उन लोगों के लिए होता है जो जीवन में कर्म बंधनों से जुड़े होते हैं.
आत्मा की शांति से जुड़ी मान्यता
मान्यता है कि छोटे बच्चों की आत्मा बिना किसी बाधा के सीधे परमधाम को प्राप्त होती है, इसलिए उनके लिए शोक और जटिल विधियों की बजाय सरल और शांतिपूर्ण विदाई दी जाती है.
सामाजिक और पारंपरिक पहलू
भारत के कई हिस्सों में आज भी यह परंपरा निभाई जाती है, हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में रीति-रिवाजों में थोड़ा अंतर हो सकता है.
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