Chardham Yatra देहरादून: उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UEPPCB) के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के मार्गदर्शन में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आने वाले चारधाम प्रोजेक्ट में एकल उपयोग प्लास्टिक अभियान को सफल बनाने का प्रयास कर रहा है।
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2026 की चारधाम यात्रा को प्लास्टिक-मुक्त और स्वच्छ बनाने के लिए योजना बनाई है। बोर्ड ने रिकॉर्ड कचरे को देखते हुए, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध, निगरानी और जुर्माने की तीन-स्तरीय रणनीति अपनाई है, साथ ही कूड़े के निस्तारण के लिए विशेष प्रबंधन के निर्देश दिए हैं।

धीरज गरब्याल बने उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड के नए सचिव व सीईओ
चारधाम यात्रा (2026) के लिए प्रदूषण बोर्ड की प्रमुख खबरें:
सख्त प्रतिबंध और जुर्माना: सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के उपयोग पर पूरी तरह से रोक है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई और भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
निगरानी रणनीति: यात्रा मार्गों पर प्लास्टिक कचरे की जाँच के लिए तीन-स्तरीय रणनीति (जागरूकता, विकल्प और सख्ती) अपनाई जा रही है।
प्लास्टिक विकल्प: यात्रियों को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के विकल्प खोजने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है और कूड़े के निस्तारण की नई व्यवस्था की जा रही है।
कचरा प्रबंधन: केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में बढ़ते कचरे के अध्ययन के बाद, वन विभाग के साथ मिलकर वेस्ट मैनेजमेंट के कड़े प्रावधान लागू किए गए हैं।
यात्रा का समय: 2026 की चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होकर श्रद्धालुओं के लिए खुलेगी, जिसमें सुरक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर होगा।
बोर्ड ने स्थानीय निवासियों और यात्रियों से अपील की है कि वे देवभूमि को प्लास्टिक मुक्त रखने में सहयोग करें और अपनी गाड़ियों में ही कचरा बैग (कचरा बैग) रखें।
मानसी खुल्बे, विशेष संवाददाता
सहारा समय उत्तराखंड
यह भी पढ़ें – “ये कैसी प्रोपेगेंडा फिल्म है”, ‘Dhurandhar’ देख ये क्या बोल गए Shatrughan Sinha


























