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Bihar News : कांग्रेस–RJD गठबंधन टूटने की कगार पर? बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर!

बिहार में करारी चुनावी हार के बाद कांग्रेस बड़ा राजनीतिक फैसला लेने की तैयारी में है. सूत्रों के अनुसार, पार्टी जल्द ही महागठबंधन से अलग होकर RJD से गठबंधन खत्म कर सकती है. इसकी आधिकारिक घोषणा नए साल में हो सकती है. 27 नवंबर को दिल्ली में हुई समीक्षा बैठक में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल ने बिहार के सभी हारे हुए उम्मीदवारों से बंद कमरे में अलग-अलग बात की.

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बैठक में कांग्रेस नेतृत्व ने संकेत दिया कि पार्टी अब बिहार में नए सिरे से अपना संगठन और वोट बेस तैयार करेगी. इस बार EBC-OBC पर फोकस करने की रणनीति नाकाम मानी जा रही है. इसलिए पार्टी फिर से अपने पारंपरिक वोट बैंक—मुस्लिम, दलित, ब्राह्मण और भूमिहार—पर लौटने की योजना बना रही है. बिहार की जातीय जनगणना के अनुसार, यह वोट बैंक मिलकर लगभग 44% होता है, जो कांग्रेस की नजर में एक मजबूत सामाजिक आधार है.

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प्रदेश नेतृत्व में बदलाव की मांग के बावजूद कांग्रेस हाईकमान ने फिलहाल ऐसा कोई कदम नहीं उठाने का निर्णय लिया है. संगठनात्मक फेरबदल जरूर होगा और युवा नेताओं को अधिक स्थान देने की तैयारी है. विधानसभा चुनाव के बाद अब अगले चार साल तक बिहार में कोई चुनाव नहीं है, इसलिए कांग्रेस खुद को RJD की छत्रछाया से मुक्त कर स्वतंत्र ताकत के रूप में खड़ा करना चाहती है.

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लोकसभा चुनाव में पप्पू यादव के साथ गठजोड़ भी पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हुआ. कांग्रेस पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र में सबसे बुरी हार झेली, जिसके बाद पार्टी अब उनसे भी दूरी बना सकती है. समीक्षा बैठक में राहुल गांधी ने पप्पू यादव से मिलने से भी इनकार किया.

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सूत्र बताते हैं कि कई उम्मीदवारों ने टिकट वितरण में गड़बड़ी, स्थानीय नेताओं की उपेक्षा, महागठबंधन में तालमेल की कमी और AIMIM के प्रभाव को हार का मुख्य कारण बताया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कांग्रेस-RJD गठबंधन टूटता है तो उसका सबसे बड़ा लाभ BJP को मिल सकता है, क्योंकि विपक्षी वोटों का बिखराव बढ़ जाएगा.

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कांग्रेस 2009 और 2010 में भी RJD से अलग होकर चुनाव लड़ चुकी है, हालांकि बाद में दोनों दल फिर साथ आए. लेकिन इस बार पार्टी चार साल की लंबी राजनीतिक तैयारी के साथ फिर से स्वतंत्र रास्ता चुन सकती है.