यूपी विधानसभा चुनाव का संग्राम भविष्य के गर्भ में है. लेकिन सियासी आरोप प्रत्यारोप शुरू हो चुका है. सियासी समीकरण बैठाने की चालें भी चली जा रही हैं. चलिए यूपी में ओवैसी, अखिलेश यादव और चंद्रशेखकर की सियासत समझते हैं.
अखिलेश की सांसदों संग बैठक, ओवैसी और चंद्रशेखर का बढ़ा खौफ?
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समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने मंगलवार को लखनऊ में अपने लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई. बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी पंचायत चुनाव और संगठन की मजबूती था, लेकिन इस चर्चा के दौरान दो ऐसे नाम उभरे जिन्होंने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है. असदुद्दीन ओवैसी और चंद्रशेखर आजाद.
महाराष्ट्र के निकाय चुनाव (BMC) और बिहार के पिछले नतीजों ने सपा को सोचने पर मजबूर कर दिया है. बैठक में एक सांसद ने साफ तौर पर कहा कि जिस तरह ओवैसी का प्रभाव मुस्लिम बेल्ट में बढ़ रहा है, वह 2027 के लिए खतरे की घंटी है. वहीं एक अन्य सांसद ने चंद्रशेखर आजाद का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वे जमीन पर सपा के स्थानीय नेताओं को तोड़ रहे हैं. हालांकि, अखिलेश यादव ने अपने सांसदों को भरोसा दिलाया कि वे इन चुनौतियों से निपट लेंगे, लेकिन सवाल यह है कि क्या भविष्य में ओवैसी ‘इंडिया गठबंधन’ का हिस्सा बनेंगे या अखिलेश को अकेले ही इस सेंधमारी को रोकना होगा?
पीडीए की लड़ाई और 2027 की रणनीति
सांसदों की बैठक से बाहर आए नेताओं ने भले ही कैमरे पर ओवैसी के नाम को टालने की कोशिश की, लेकिन उनके बयानों में ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की एकता का जिक्र बार-बार आया. सांसदों ने कहा कि रणनीति बन चुकी है और जो भी भाजपा के खिलाफ लड़ाई में साथ आएगा, उसका स्वागत है. यह इशारा इस तरफ भी हो सकता है कि सपा भविष्य में छोटे दलों को साथ लेने के विकल्प खुले रख रही है. अखिलेश यादव ने सांसदों को महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के मुद्दों पर जनता के बीच जाने का निर्देश दिया है.
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा के चुनाव प्रस्तावित हैं. इस बीच देवरिया स्थित सलेमपुर से सांसद रमाशंकरराजभर ने नया दावा कर दिया है. 2027 चुनाव के संदर्भ में राजभर ने कहा था कि वो 2027 मेऑल इंडिया इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) का स्वागत करने के लिए तैयार हैं. पीडीए में सबका स्वागत है. सपा की बीजेपी को हरा सकती है. ओवैसी के सवाल पर उन्होंने कहा था कि जिसको भी पीडीए के साथ आना है आना चाहिए .
AIMIM ने अखिलेश यादव के साथ गठबंधन पर क्या कहा?
अब उनके इस बयान पर सियासी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है. AIMIM प्रवक्ता असीम वकार ने. रमाशंकर राजभर के बयान पर कहा कि यह पूरी तरह से भ्रामक और गुमराह करने वाला बयान है. वो मीडिया पर स्वागत करते है और जब घर जाओ तो हमारे मुंह पर अपना दरवाजा बंद करके हमको ज़लील करते है. अगर उनकी बात सच है तो अपने बॉस अखिलेश यादव जी से कहें कि हमको दावतनामा भेजें.
























