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यूपी में देखिए कैसे सरकारी लूट करते हैं ‘झांसेबाज अधिकारी’?

bulandshahar

बुलंदशहर । उत्तर प्रदेश जनपद बुलंदशहर में भ्रष्ट अधिकारियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि इनके लिए पैसे के आगे कुछ दिखाई नहीं देता। सरकार एवं जनता के धन को यह अधिकारी अपना धन मानकर बैठे हैं। बिना काम करें पैसे का बंदर वाट कर लिया जाता है। आपको बता दें यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के जनपद बुलंदशहर के विकासखंड गुलावटी के अंतर्गत आने वाले गांव मोहन का है।

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लगभग ₹2 लाख रुपए का फर्जी पेमेंट निकाल लिया गया है

गांव में सौरभ यादव के द्वारा अपने घर की गली को खुद की धनराशि से बनाया गया जिस पर इनके द्वारा लगभग 12 से 13 हजार रुपए खर्च किए गए। गली को सीसी टाइल्स से बनाया गया है। सौरभ यादव की बात माने तो उनके द्वारा बताया गया यह गली उन्होंने स्वयं की धनराशि से बनाई है लेकिन गांव के बाहर जहां पर निर्माण कार्य इस गांव में कराए गए हैं सभी कार्यों का विवरण बॉर्डर पर अंकित किए गए हैं। जब सौरव यादव को पता चला कि उनकी गली का नाम भी उसे बोर्ड पर अंकित है इसके निर्माण कार्य को दिखा करके लगभग ₹2 लाख रुपए का फर्जी पेमेंट निकाल लिया गया है।

इसकी शिकायत सौरभ यादव के द्वारा पत्राचार के माध्यम से मुख्य विकास अधिकारी बुलंदशहर, जिलाधिकारी बुलंदशहर एवं मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से लिखित प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करके की गई है। साथ ही साथ उनके द्वारा सरकारी साइड आइजीआरएस के माध्यम से भी शिकायत की गई। वही सरकारी तंत्र पर आरोप लगाते हुए उनके द्वारा कहा गया फर्जी रिपोर्ट लगाकर बिना जांच किए शिकायत को निस्तारित कर दिया गया है।

सहारा समय द्वारा जब इस मुद्दे को उठाया गया तो शिकायतकर्ता द्वारा बड़े गंभीर आरोप ग्राम सचिव तथा ग्राम प्रधान पर लगाए गए हैं शिकायती पत्र के माध्यम से भी यह आरोप लगाए गए हैं की फर्जी तरीके से उनकी गली का बिना निर्माण कराए कार्य योजना में शामिल कर लिया गया जबकि इस गली को शिकायतकर्ता द्वारा बनाया गया है। निर्मित गली का भुगतान लगभग ₹ 02 लख रुपए फर्जी निकाल लिए गए हैं। सहारा समय ने जब संबंधित अधिकारी से दूरभाष पर बात की तो उनके द्वारा बताया गया कि संबंधित प्रकरण उनके संज्ञान में नहीं है शिकायत से संबंधित कोई प्रपत्र उनको प्राप्त नहीं हुआ है. लेकिन बड़ा सवाल यह है जब शिकायती पत्र प्राप्त नहीं हुआ तो आखिर किसके द्वारा रिपोर्ट लगा करके आईजीआरएस की शिकायत का निस्तारण किया गया है।

फर्जी भुगतान निकाले जाने पर कौन जिम्मेदार है? आखिर इस पूरे प्रकरण में कब होगी जांच? दोषी को कब मिलेगी सजा? जनता के सरकार के पैसे को यह अधिकारी ऐसे ही लूटते रहेंगे। गांव में विकास के नाम पर ऐसे ही फर्जी पेमेंट निकल जाते रहेंगे। शिकायतकर्ता द्वारा मांग की गई है इस पंचवर्षीय योजना में ग्राम सचिव/ प्रधान द्वारा कराए गए विकास कार्यों की जांच होती है तो ऐसे बहुत प्रकरण सामने आएंगे जहां पर सरकारी धनराशि का दुरुपयोग/बंदर वाट किया गया है।

सहारा समय के सवाल

  1. आखिर कब होगी कार्य की जांच शिकायतकर्ता को कब मिलेगा न्याय?
  2. शिकायतकर्ता द्वारा व्यक्तिगत सीसी टाइल्स से बनाई गई गली पर फर्जी भुगतान निकल जाने पर दोषी कौन? और कारवाई कब?
  3. क्या संबंधित अधिकारियों द्वारा ऐसे और भी गांव में कराए गए हैं कार्य? सभी कार्यों की क्या होगी जांच?
  4. आईजीआरएस पर की गई शिकायत पर फर्जी रिपोर्ट लगाई जाने वाले अधिकारियों पर कब होगी कार्रवाई?

जनता के पैसे का जिस तरह से अधिकारी बंदर बात कर रहे हैं और भ्रष्टाचार करने में इनके हाथ पैर भी नहीं कटते जबकि उत्तर प्रदेश के मुखिया द्वारा साफ तौर से कहा गया है भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा मुखिया के इस आदेश के बावजूद भी अधिकारियों कर्मचारियों में किसी प्रकार का डर नहीं है और नौकरशाही मनमानी करने पर तुली हुई है। शिकायतकर्ता द्वारा जब अधिकारियों एवं शासन से शिकायत की गई है आखिर अब तक क्यों नहीं हो पाई है कार्रवाई? क्यों नहीं की गई है जांच?

बुलंदशहर, सहारा समय, उदय यादव