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Moradabad : 25 हजार रोजगारों पर चला बुलडोजर,1972 से चल रही दुकानों पर संकट

Moradabad: Bulldozer runs on 25 thousand jobs, crisis on shops running since 1972

मुरादाबाद : बस स्टैंड पर रेलवे का बुलडोजर एक्शन: 1972 से चली आ रही दुकानों पर संकट, 25 हजार परिवारों का रोजगार खतरे में। दुकानदारों का उग्र विरोध प्रदर्शन जारी, DRM पर मनमानी का गंभीर आरोप, कोर्ट में लंबित मामला फिर भी कार्रवाई तेज।

बुलडोजर कार्रवाई का पूरा विवरण

मुरादाबाद शहर के हृदयस्थल पर बसे व्यस्त बस स्टैंड क्षेत्र में रेलवे प्रशासन ने सोमवार को भारी बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी। दशकों पुरानी सैकड़ों दुकानों को खाली कराने और तोड़ने के लिए मशीनें उतार दी गईं। ये दुकानें 1972 से लगातार संचालित हो रही हैं और स्थानीय व्यापारियों, चाय-पान वालों से लेकर छोटे-मोटे कारोबारियों तक के लिए जीवन रेखा बनी हुई हैं। अचानक आई इस कार्रवाई से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। दुकानदारों ने मशीनों को रोकने की कोशिश की, सामान हटाया और सड़क जाम कर विरोध जताया। भारी पुलिस बल ने स्थिति को काबू में करने के लिए बैरिकेडिंग की।

दुकानदारों का आक्रोश और मांगें

प्रभावित दुकानदारों का कहना है कि यह कार्रवाई करीब 25 हजार परिवारों के भविष्य पर संकट ला रही है। दुकानदार संगठन के नेताओं ने रेलवे के DRM पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि 2002 में जब यह जमीन नॉर्थ रेलवे के अधीन आई, तब रेलवे ने ही किराया तय किया था। वे बिना किसी चूक के किराया जमा करते आ रहे हैं। अब किराया बढ़ाने या पुराना ब्याज लगाने को भी तैयार हैं, लेकिन दुकानों को तोड़ने का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका स्पष्ट संदेश है- “हमारी दुकानें हमारी रोजी-रोटी हैं, इन्हें बचाओ वरना भुखमरी का डर है।” इसके अलावा, सरकारी पुनर्वास नीति का हवाला देकर वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई है।

उग्र विरोध प्रदर्शन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी

कार्रवाई के खिलाफ दुकानदारों ने सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। नारेबाजी के बीच रेलवे प्रशासन के खिलाफ जमकर रोष व्यक्त किया गया। “रेलवे हाय-हाय”, “दुकान बचाओ” जैसे नारे गूंजे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से बार-बार मुलाकात की गई, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। दुकानदारों ने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं रुकी तो आंदोलन बड़े स्तर पर फैल जाएगा और अन्य व्यापारिक संगठन भी शामिल हो जाएंगे। यह इलाका मुरादाबाद की व्यापारिक धुरी है, जहां रोज हजारों यात्री आते-जाते हैं।

कानूनी जंग और तनावपूर्ण माहौल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि मामला फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन है और कोई अंतिम फैसला नहीं आया, फिर भी रेलवे क्यों कार्रवाई कर रहा है? दुकानदारों ने सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखे हैं और कोर्ट में पेश करने को तैयार हैं। रेलवे का कहना है कि जमीन पर अवैध कब्जा है, लेकिन दुकानदारों के पास पुराने किराया रसीदें मौजूद हैं। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है। यदि बातचीत नहीं हुई तो यह विवाद लंबा खिंच सकता है।

यह कार्रवाई न केवल स्थानीय व्यापार को प्रभावित करेगी बल्कि बस स्टैंड का यातायात भी बाधित हो सकता है। दुकानदार संगठन ने कहा है कि वे कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और उच्च अधिकारियों तक पहुंचेंगे। यदि रेलवे बातचीत के लिए राजी होता है तो किराया समझौता या पुनर्वास से मामला सुलझ सकता है। मुरादाबाद जैसे महत्वपूर्ण शहर में ऐसी घटना से राजनीतिक रंग भी ले सकती है। फिलहाल सभी की नजरें प्रशासनिक स्तर पर समाधान पर टिकी हैं।

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