बुलंदशहर : उत्तर प्रदेश के जनपद बुलंदशहर में सिंचाई विभाग खंड 4 इस समय सुर्खियों में बना हुआ है। विभाग के प्रतिदिन नए कारनामे देखने को मिल रहे हैं। हाल ही में एक मामला सामने आया है विभाग द्वारा कहा जा रहा है कि अनूपशहर नहर की पटरी अनूपशहर में किलोमीटर 116 से 118 वित्तीय वर्ष 2023-24 में लगभग 1 करोड़ की धनराशि से नवीनीकरण कराया गया तथा 2024-25 में इसी रोड पर किलोमीटर 118 से 124 में रोड पर नवीनीकरण का कार्य भी लगभग 1 करोड़ की धारा राशि से कराया गया। लेकिन समझने वाली बात यहां पर यह है कि जब कार्य कराया गया है तो इस कार्य का साक्ष्य संबंधित विभाग के पास आखिर क्यों नहीं है।
2 करोड़ की धनराशि के गवन के बारे में जब मुद्दा गरमाया तो सिंचाई विभाग के अधिकारी हर मामले से बचते नजर आए। अभिलेख मांगे जाने पर ना तो कोई अभिलेख दिखाया गया न ही दिया गया उल्टा अधिकारियों द्वारा ज्ञान दिया गया अगर चाहिए तो आरटीआई से मांग लो जो कुछ आपको चाहिए। लेकिन सबसे बड़ा सवाल जब सार्वजनिक धनराशि सार्वजनिक स्थल पर जनता के लिए लगाई जा रही है और शासन द्वारा दी जा रही है तो यह अधिकारी किस अधिकार से इस धनराशि को छुपा रहे हैं।
प्रकरण की जानकारी पर बोले सहायक अभियंता अनुज सम्मी
पूरा मामला सामने आने पर बुलंदशहर खंड 4 के सहायक अभियंता अनुज सम्मी से जब इन इस बारे में बातचीत की गई। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि यह रोड उनके द्वारा बनाई गई है इसकी वीडियो ग्राफी ड्रोन से कराई गई है रोड से संबंधित सभी साक्ष्य हमारे पास हैं अगर आपको कोई भी साक्षी चाहिए तो एक प्रार्थना पत्र अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग मेरठ के नाम हमें दे दो आपको रोड से संबंधित सभी प्रपत्र तथा वीडियो और फोटो आपको उपलब्ध करा दिए जाएंगे। इस संदर्भ में 6 दिसंबर 2025 को एक प्रार्थना पत्र सहायक अभियंता के कार्यालय में उपस्थित होकर के दिया गया प्रार्थना पत्र प्राप्त करने के उपरांत सहायक अभियंता द्वारा कहा गया कि यह सूचना शाम तक आपको उपलब्ध करा दी जाएगी लेकिन 3 दिन बीत जाने के बाद भी कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया इसकी जानकारी करने पर सहायक अभियंता ने गुमराह करते हुए कहा कि यह जानकारी मैं नहीं दे सकता हूं इसके लिए आपको मेरठ जाना पड़ेगा हमारे उच्च अधिकारी वहीं बैठते हैं। सामने से स्पष्ट रूप से अपने आप को बचाते हुए और गुमराह करते हुए सहायक अभियंता अनुज सम्मी नजर आए।

मनमोहन सिंह अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग मेरठ
12 दिसंबर 2025 को अधिशासी अभियंता मनमोहन सिंह से संपर्क किया गया जब उनके कार्यालय पर पहुंचे तो अधिशासी अभियंता कार्यालय से सुबह 11:15 तक भी उपस्थित नहीं थे। दूरभाष पर उनसे संपर्क किया गया तो उनके द्वारा बताया गया कि वह कार्यालय में ही उपस्थित है जबकि कार्यालय में उपस्थित नहीं थे। कार्यालय में आने पर उन्होंने बताया कि आपके द्वारा दिया गया प्रार्थना पत्र उन्हें प्राप्त हो गया है उन्हें किसी भी प्रकार का कागज देने में कोई परेशानी नहीं है और इस बात को टालते हुए 15 दिसंबर 2025 तक रिपोर्ट देने की बात कही गई।
15 दिसंबर 2025 को जब उनसे रिपोर्ट लेने के लिए उनके कार्यालय पहुंचे तो अधिकारी ऑफिस ही नहीं पहुंचे और रिपोर्ट को व्हाट्सएप पर उपलब्ध कराने की बात कही गई बाद में एक पत्र भेजा गया और उसको भी डिलीट कर दिया गया। फोन पर बात करने पर उन्होंने कहा हम कोई रिपोर्ट आपको नहीं देंगे। मीडिया को किसी भी प्रकार की रिपोर्ट नहीं देंगे। सवाल यह है कि क्या मीडिया उनका कोई व्यक्तिगत कागज मांग रही थी जहां रोड ना बनाए जाने के आरोप लग रहे हो और सब कुछ सार्वजनिक हो ऐसी स्थिति में आखिर प्रपत्र देने से क्यों बच रहे थे अधिकारी आखिर क्या घोटाला इनके द्वारा किया गया था जांच का विषय।
रोड बनाए जाने में खेल
आपको बताते चलें जिस रोड को सिंचाई विभाग अपनी बता रहा है वहीं दूसरी ओर इस रोड पर किए गए कार्य का जिक्र पीडब्ल्यूडी द्वारा भी कराए जाने का मामला सामने आया है। अब सवाल यह है कि आखिर किसके द्वारा इस रोड पर कार्य किया गया है और किसके द्वारा धनराशि का गवन किया गया है। जांच का विषय गवन की हुई धनराशि का जिम्मेदार कौन?

रोड पर क्या हुआ खेल?
अनूपशहर नहर की पटरी पर बाई ओर बनी सड़क डीएलपी के अंतर्गत आता है रोड पर कार्य कराए जाने को लेकर अभी 1 वर्ष भी पूर्ण नहीं हुआ है उसके बावजूद भी इसी सड़क पर पीडब्ल्यूडी द्वारा 34 करोड़ से चौड़ीकरण का कार्य शासन को गुमराह कर सिंचाई विभाग की इस धरोहर पर स्वीकृत करा लिया गया है। जब इस काम के संबंध में एनओसी के बारे में पूछा गया तो उनके द्वारा बताया गया कि कोई भी निक उनके द्वारा नहीं दी गई है लिखित में जवाब मांगा गया तो जवाब देने से बचते नजर आए अधिकारी।
क्या है प्रमुख सचिव के आदेश?
प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश के स्पष्ट रूप से आदेश के बावजूद भी डीएलपी रोड पर 1 वर्ष कार्य पूर्ण को नहीं हुआ है 34 करोड़ का प्रस्ताव शासन को गुमराह कर भेज कर मंजूर कर लिया गया है और इस संबंध में कोई भी एनओसी सिंचाई विभाग से पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता राहुल शर्मा द्वारा नहीं ली गई है। प्रमुख सचिव ने डीएलपी के अंतर्गत आने वाली रोड का प्रस्ताव शासन को भेजने के लिए स्पष्ट रूप से मना किया हुआ है तो आखिर शासन को गुमराह कर किस तरह से बिना एनओसी लिए किस तरह से पास कर लिया गया। क्या 2 करोड़ के घोटाले के मामले में कही प्रांतीय खंड पीडब्ल्यूडी बुलंदशहर भी तो शामिल नहीं है।
अगर इस पूरे मामले में उच्च स्तरीय दोनों विभागों की 2 वर्षीय कार्य योजना की तथा इन 2 वर्षों में किए गए कार्यों की निष्पक्ष जांच हो जाती है तो जो तथ्य सामने आएंगे वह चौंकाने वाले होंगे किस तरह से इन लोगों ने शासन को गुमराह कर शासन के धान का दुरुपयोग किया है। पूछे जाने पर उच्च अधिकारियों का बहाना मार कर अपने आप को सुरक्षित कर लेते हैं इस तरह के अधिकारी। सरकार की मान्य मुख्यमंत्री जी की छवि को खराब करने में लगे हैं यह अधिकारी कहीं यह अधिकारी विपक्ष को की रही सरकारों में मलाई खाने वाले तो नहीं है? या सरकार की छवि खराब करके विपक्ष को मुद्दा तो नहीं दे रहे हैं इनकी उच्च स्तरीय जांच हनी अति आवश्यक है।
सूत्रों से मिली खबर के अनुसार प्रांतीयखंड के अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी बुलंदशहर के संबंध उच्च स्तरीय अधिकारियों से भी बताए जा रहे हैं सूत्रों से जानकारी यहां तक मिल रही है कि यह किसी भी प्रकार के मामले को दबाने में सक्षम है क्योंकि उनके रिलेशन में विभाग के कुछ अधिकारी उच्च स्तर पर रहे हैं जहां से इनका मनोबल मिल रहा है यह भी जांच का विषय है। देखना होगा कि इस पर क्या जांच होती है या जांच के नाम पर खाना पूर्ति ही होगी और फिर इस मुद्दे को दवा दिया जाएगा।
रिपोर्ट – उदय यादव बुलंद शहर
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