बुलंदशहर: उत्तर प्रदेश सरकार का दावा है कि भ्रष्टाचार और भयमुक्त समाज का निर्माण हो रहा है. वहीं अधिकारी आखिर किसकी सह पर भ्रष्टाचार और सरकारी तंत्र के नियमों को ताक पर रख सरकार को चूना लगा रहे हैं. आखिर यह अधिकारी किसकी सह पर ऐसा कर रहे हैं क्या इन अधिकारियों को सरकार का जरा भी भय नहीं है जांच का विषय आखिर इस सब के पीछे कौन जिम्मेदार है? पूरा मामला उन पुलियाओं से संबंधित है जिनको अभी पूर्व में सिंचाई विभाग द्वारा बनाया गया और उन्ही पुलियों का प्राक्कलन पीडब्ल्यूडी के विभाग प्रांतीय खंड बुलंदशहर द्वारा शासन को पुनः निर्माण के लिए भेजा गया और आश्चर्य की बात यह है कि उन्हें निर्माण के लिए पास भी करा लिया गया साथ ही टेंडर भी कर दिया गया..
सिंचाई विभाग ने 2 करोड़ धनराशि का 2 साल में कर दिया खेल? अधिकारी मौन जिम्मेदार कौन?
इस संबंध में जब सहारा समय द्वारा इस मुद्दे को उठाया गया तो अधिशासी अभियंता राहुल शर्मा से जानकारी करने के लिए संपर्क किया गया तो उन्होंने स्पष्ट तौर से बात करने के लिए मना कर दिया. भ्रष्टाचार के इस खेल पर पक्ष लेने के लिए अधीक्षक अभियंता मनीष वर्मा को दूरभाष के माध्यम से बात करने की कोशिश की गई तो उनके द्वारा भी बिना जानकारी दिए दूरभाष नंबरों को ही ब्लैक लिस्ट में डाल दिया गया और जानकारी देने से मना कर दिया गया. जब उनके ऑफिस पर उनसे संपर्क किया गया तो बातचीत के दौरान उन्होंने कोई भी जानकारी साझा करने के लिए स्पष्ट मना कर दिया. जब पुलियाओं का मुद्दा सहारा समय ने अधीक्षक अभियंता से गंभीरता पूर्वक उठाया तो मिली जानकारी के अनुसार आनन फानन में टेंडर निरस्त करने के साथ बजट को सरेंडर करने की कार्रवाई गोपनीय तरीके से की जा रही है.
कौन सी है वह पुलिया जिन पर खेला गया खेल
- खालौर से तोली संपर्क मार्ग के किलोमीटर एक में क्षतिग्रस्त पुलिया का निर्माण कार्य,
- स्याना ऊंचागांव व भड़काऊ नरसेना नहर पटरी मार्ग के किलोमीटर 31 से अमरपुर संपर्क मार्ग के किलोमीटर एक में स्थित क्षतिग्रस्त सकरी पुलिया का पुन निर्माण कार्य.
- बिचेला मार्ग के किलोमीटर 2 से डूंगरा जोगी सुनाई पैई होते हुए शिवरामपुर मार्ग पर किलोमीटर एक में स्थित पुनः निर्माण का कार्य.
- खनौदा से जटपुरा मार्ग पर किलोमीटर एक में स्थित क्षतिग्रस्त सकरी पुलिया के उन्हें निर्माण का कार्य
ऐसी और भी पुलियां है जिनकी जांच होना अति आवश्यक है और इस संदर्भ में जब अधिशासी अभियंता एवं अधीक्षक अभियंता से जानकारी ली गई तो अधिकारियों द्वारा इस मामले को दबाने की कोशिश की गई और अपनी जवाब देही से स्पष्ट रूप से बचते नजर आए.
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किया जा रहा है बजट को सरेंडर
उत्तर प्रदेश के जनपद बुलंदशहर में अधिशासी अभियंता राहुल शर्मा के द्वारा आखिर बजट को सरेंडर करने की नौबत क्यों आ गई? आपको बताते चलें सूत्रों के हवाले से मिली खबर के अनुसार इनके द्वारा अन्य कार्य भी सिंचाई विभाग से बिना एनओसी के किया जा रहा हैं और पूर्व में भी इस प्रकार के कार्य किए गए हैं. अगर इनके द्वारा इस कार्य पर सिंचाई विभाग से एनओसी ली गई होती तो इस तरह से सरकारी पैसे का दुरुपयोग नहीं हुआ होता. सहारा समय द्वारा जब मुद्दे को उठाया गया तो उनके द्वारा बजट सरेंडर करने के फ्रॉड में यह विभाग लग गया है. अगर इस मुद्देको उठाया नहीं गया होता तो सिंचाई विभाग द्वारा बनाई गई पुलियों का हो सकता है उन्हें पुलियों को अपना दिखाकर धनराशि को निकाल लिया गया होता जो शासन के पैसे का पूर्ण रूप से भ्रष्टाचार होता.
सहारा समय का सवाल
- सड़कों पर हो रहे भ्रष्टाचार फर्जी तरीके से निकाले जा रहे पेमेंट पर कौन है जिम्मेदार?
- आखिर मीडिया किससे पूछे सवाल? जनपद स्तर पर किसकी है जवाबदेही? जब भी इनसे सवाल पूछे जाते हैं तो उनके द्वारा सिर्फ एक ही जवाब दिया जाता है कि हम जवाब देने के लिए अधिकृत नहीं है?
- सिंचाई विभाग की भूमि पर सिंचाई विभाग की बिना अनुमति के बिना एनओसी के आखिर कैसे हो जाता है प्रोजेक्ट पास आखिर किस तरह से नियम और शर्तों को रख दिया जाता है तक पर बहुत ही गंभीर विषय इसकी गंभीरता पूर्वक होनी चाहिए जांच दोषी अधिकारियों पर हो कठोर कार्रवाई जनता के पैसे का किया जा रहा है दुरुपयोग?
पुलियाओं के अतिरिक्त अन्य कार्यों की हो जांच
पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड बुलंदशहर में बहुत से कार्य इसी तरह से कराए गए हैं? सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार पिछले 2 वर्षों में इस विभाग द्वारा बहुत से ऐसे कार्य कराए गए हैं जो नियम अनुसार पूर्ण रूप से गलत है और उन कार्यों पर सरकार की धनराशि का पूर्ण रूप से दुरुपयोग किया गया है आपको बता दे खबर यहां तक मिल रही है प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता के संबंध उच्च अधिकारियों से भी बताई जा रहे हैं जिनके आधार पर इस तरह का खेल खेला जा रहा है प्रेस द्वारा पूर्व में भी इस तरह के मुद्दे उठाए गए हैं प्रेस द्वारा जांच कराए जाने पर फर्जी रिपोर्ट भी उनके उच्च अधिकारियों द्वारा भी प्रेषित शासन को की गई है.
रिपोर्ट – उदय यादव, सहारा समय, बुलंदशहर



























