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Etah : गरीबों का निवाला लूटता राशन माफिया, प्रशासन मौन जिम्मेदार कौन?

Etah: Ration mafia looting the food of the poor, administration silent, who is responsible?

उ.प्र. एटा : से इस वक्त की सबसे बड़ी और शर्मनाक खबर जहां गरीबों के हक पर खुलेआम डाका डाला जा रहा है और राशन माफिया प्रशासन को ठेंगा दिखा रहा है। जनपद एटा में सरकारी राशन की खुलेआम कालाबाजारी और जब इस गोरखधंधे की जानकारी मीडिया को लगी तो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को ही गालियां दी गईं और अभद्रता की गई।

पत्रकारों पर माफिया का फिल्मी हमला

पत्रकार जब मौके पर पहुंचकर गरीबों के चावल की कालाबाजारी की कवरेज कर रहे थे, तभी वहां राशन माफिया अमित गुप्ता उर्फ डब्बू स्कॉर्पियो गाड़ी से फिल्मी अंदाज में पहुंचा। आरोप है कि अमित गुप्ता ने पत्रकारों को भद्दी-भद्दी गालियां दीं, जान से मारने की धमकी दी और कहा—“सालों, यहां से भाग जाओ, नहीं तो जान से मार दिए जाओगे। मैं एटा प्रशासन को जेब में लेकर घूमता हूं, पुलिस और अधिकारी मेरे इशारों पर नाचते हैं।” इतना ही नहीं, राशन माफिया ने अपने साथ आए गुंडों के दम पर कालाबाजारी की राशन गाड़ी जबरन उठवाई और मौके से फरार हो गया।

प्रशासन की चुप्पी पर सवालों की बौछार

बड़ा सवाल यह है कि क्या जनपद एटा में राशन माफिया प्रशासन से ऊपर हो चुका है? क्या पुलिस और अधिकारी राशन माफियाओं की ढाल बने हुए हैं? क्या गरीबों का निवाला प्रशासन की मिलीभगत से लूटा जा रहा है? अगर वाकई पुलिस और प्रशासन माफियाओं के इशारे पर काम नहीं कर रहा तो—अब तक एफआईआर क्यों नहीं? माफिया की गाड़ी जब्त क्यों नहीं? सरकारी राशन की लूट पर चुप्पी क्यों?

लोकतंत्र की लड़ाई: एटा प्रशासन जगो!

यह घटना सिर्फ पत्रकारों पर हमला नहीं, बल्कि एटा प्रशासन के मुंह पर करारा तमाचा है। यह लड़ाई सिर्फ पत्रकारों की नहीं, बल्कि गरीबों के हक और लोकतंत्र की है। अब देखना होगा क्या एटा प्रशासन माफियाओं के आगे घुटने टेकता है या गरीबों के हक में सख्त कार्रवाई करता है।

रिपोर्टर : करन प्रताप सिंह

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