कुशीनगर: जनपद के उपनगर खड्डा से एक बड़ा वित्तीय धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय व्यापारिक जगत को हिला कर रख दिया है। गोरखपुर से सक्रिय एक संगठित गिरोह पर आरोप है कि उसने AISSHPRA Gold और उसकी कथित फ्रेंचाइजी के नाम पर एक व्यापारी से ₹45 लाख रुपये की ठगी की।
फर्जी कंपनी और टैक्स इनवॉइस से कराई गई रकम ट्रांसफर
पीड़ित व्यापारी ओमप्रकाश जायसवाल, जो खड्डा क्षेत्र के प्रमुख व्यापारियों में से एक बताए जा रहे हैं, ने पुलिस में दर्ज शिकायत में कहा कि गिरोह ने पुराने पारिवारिक और व्यापारिक संबंधों का फायदा उठाकर उन्हें भरोसे में लिया।
आरोपियों ने उन्हें AISSHPRA Gold कंपनी की फ्रेंचाइजी देने का झांसा दिया और फर्जी GST टैक्स इनवॉइस, QR कोड, और व्हाट्सएप संदेशों के ज़रिए अलग-अलग बैंक खातों में लाखों रुपये मंगवा लिए।
चौंकाने वाली बात यह रही कि जांच में पाया गया कि AISSHPRA Gold के नाम पर जारी सभी इनवॉइस और दस्तावेज पूरी तरह फर्जी थे। आरोपियों ने कथित तौर पर कंपनी के नाम का दुरुपयोग करते हुए पूरे नेटवर्क को सुनियोजित ढंग से संचालित किया।
गिरोह में 12 नामजद और कई अज्ञात आरोपी शामिल
पीड़ित के अनुसार, गोरखपुर निवासी सचिन उर्फ सन्नी दुबे, सत्यप्रकाश मौर्या, और प्रशांत मणि त्रिपाठी सहित लगभग 12 नामजद आरोपी इस गिरोह का हिस्सा हैं। इसके अलावा कुछ अज्ञात सहयोगियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
जब व्यापारी ने अपने पैसे लौटाने की मांग की, तो उसे फर्जी इनकम टैक्स नोटिस भेजकर धमकाने और डराने की कोशिश की गई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरोह के पास कंप्यूटर, मोबाइल ऐप्स और डिजिटल पेमेंट सिस्टम की मदद से ठगी का पूरा तंत्र तैयार था।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई, एक आरोपी सलाखों के पीछे
पीड़ित की शिकायत पर खड्डा पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती कार्रवाई में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
थानाध्यक्ष खड्डा ने बताया कि “मामला आर्थिक अपराध से जुड़ा है। साइबर सेल और बैंक अधिकारियों की मदद से खातों की ट्रांजैक्शन जांची जा रही है। जल्द ही पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा।”
पुलिस ने आम जनता को आगाह किया है कि किसी भी कंपनी में पैसा लगाने या फ्रेंचाइजी लेने से पहले कंपनी के GST नंबर, पंजीकरण प्रमाणपत्र, और कार्यालय पते की पुष्टि ज़रूर करें।
ऐसे मामलों में फर्जी वेबसाइट, कैम-स्कैन इनवॉइस, या डिजिटल QR कोड का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। अधिकारी लोगों को सलाह दे रहे हैं कि किसी भी वित्तीय लेन-देन से पहले प्रामाणिकता की जांच करना बेहद ज़रूरी है।
रिपोर्ट- आनन्द सिंह / खड्डा
यह भी पढ़ें – कबड्डी संघ का बड़ा ऐलान : लखीसराय को मिली सीनियर स्टेट चैम्पियनशिप की मेजबानी

























