अलीगढ जम्मू-कश्मीर के डोडा में ड्यूटी के दौरान शहीद हुए अलीगढ़ के जवान मोनू का पार्थिव शरीर शनिवार को जब जवां थाना क्षेत्र के गांव दाऊपुर पहुंचा, तो पूरा गांव गम में डूब गया। तिरंगे में लिपटा शहीद का शव जैसे ही घर के दरवाजे पर पहुंचा, तो गांव वालों का सब्र एक पल में टूट गया। मां, पत्नी भाई और परिजनों की चीख-पुकार से माहौल दिल दहला देने वाला हो गया और वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
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शहीद के अंतिम दर्शन के लिए गांव में सुबह से ही लोगों का जमावड़ा लगा रहा। जैसे ही सेना के जवान पार्थिव शरीर को लेकर पहुंचे, महिलाओं की करुण चीत्कार गूंज उठी। मां बेटे का नाम पुकारते हुए बार-बार बेसुध हो रही थीं, वहीं पत्नी तिरंगे से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़ी। मासूम बेटी की आंखों में अपने पिता को खोने का असहनीय दर्द साफ झलक रहा था। गांव दाऊपुर में हर गली में सन्नाटा और हर चेहरे पर गहरा दुख छाया रहा। ग्रामीणों ने बताया कि मोनू बचपन से ही देशभक्ति की भावना से भरा हुआ था। सेना में भर्ती होने के बाद वह गांव के युवाओं को देश सेवा के लिए प्रेरित करता था। उसकी शहादत ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है।
जिलाधिकारी संजीव रंजन समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नीरज कुमार जादौन ने मौके पर पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया। पूरे राजकीय सैन्य सम्मान के साथ शहीद मोनू को अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान “भारत माता की जय” और “शहीद मोनू अमर रहें” के नारों से गांव गूंज उठा।
दाऊपुर के लोगों का कहना है कि मोनू भले ही आज हमारे बीच नहीं रहा, लेकिन उसकी शहादत गांव और देश के लिए हमेशा प्रेरणा बनी रहेगी।
इस दौरान पूर्व मंत्री एवं विधायक बरौली ठा0 जयवीर सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती विजय सिंह, ब्लॉक प्रमुख जवां श्री हरेंद्र सिंह, श्री विजय कुंमार सिंह, समेत अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारियों ने शहीद मोनू को अश्रुपूरित अंतिम विदाई दी।
अलीगढ से आशीष वार्ष्णेय की रिपोर्ट























