कुशीनगर: उत्तर प्रदेश मत्स्य विभाग ने विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी चेपुआ मछली की कृत्रिम ब्रीडिंग को सफल बनाने के लिए एक बार फिर कदम बढ़ाया है. इस दिशा में वर्ल्ड फिश सीरीज के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की टीम ने कुशीनगर जिले के पनियहवा स्थित गंडक नदी क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया.
http://Mathura में ‘मिनी जामताड़ा’ है देवसेरस गांव, सर्च ऑपरेशन
निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने चेपुआ मछली के प्राकृतिक आवास, उसकी शिकार पद्धति, स्थानीय मछुआरों द्वारा की जाने वाली पकड़, और बाजार में बिक्री की पूरी प्रक्रिया का बारीकी से अध्ययन किया. मौके पर ही मछली का भौतिक सत्यापन भी किया गया.
कुशीनगर जिले के मत्स्य निरीक्षक लालबहादुर ने बताया कि यह सर्वे वर्ल्ड फिश सीरीज के विशेषज्ञ अरुण पड़ीयार, ज्वाइंट डायरेक्टर बृजेश कुमार, और उप निदेशक मत्स्य अनिल कुमार के नेतृत्व में संचालित किया गया। टीम ने स्थानीय मछुआरों और मछली कारोबार से जुड़े दुकानदारों से लंबी बातचीत कर उनके अनुभव, चुनौतियों और आवश्यकताओं को समझा.

विशेषज्ञों का कहना है कि गंडक नदी में चेपुआ मछली की मांग बहुत अधिक है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसका प्राकृतिक स्टॉक तेज़ी से घट रहा है. विभाग का मानना है कि यदि चेपुआ मछली की कृत्रिम ब्रीडिंग सफल होती है, तो न केवल इस प्रजाति को संरक्षण मिलेगा, बल्कि स्थानीय मछुआरों की आय में भी कई गुना वृद्धि संभव है.
रिपोर्ट- आनन्द सिंह/खड्डा
यह भी पढ़े- Bihar के पहले मुख्यमंत्री कौन थे? जानिए


























