Rahul Gandhi V/S Digvijay Singh: सियासत में कई बार दूसरे के तरकश में अपना तीर रखकर वार करते हैं. अर्थात कुल मिलाकर राजनीति में जो दिखता है वह होता नहीं और जो होता है वह दिखता नहीं है. एक सियासी छात्र को सदैव बरसै कंबल भीजै पानी वाली कबीर की उल्टी वाणी को समझना होगा. कांग्रेस में आजकल तीन नाम की चर्चा जोरो पर है. पहला- दिग्विजय सिंह, दूसरा- राहुल गांधी और तीसरा- केसी वेणुगोपाल.
क्रोनोलॉजी (Chronology) समझिए
RSS और BJP की सांगठनिक क्षमता की तारीफ दिग्विजय सिंह ने करते हुए एक्स पर लिखा. फिर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने RSS और BJP पर टिप्पणी को लेकर रविवार को मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से आपत्ति जताई. दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ में पार्टी के स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान दोनों नेता आमने-सामने हुए थे.
एक मीडिया हाउस की रिपोर्ट के मुताबिक, दिग्विजय सिंह से हाथ मिलाते समय राहुल गांधी ने उन्हें मजाकिया लहजे में कहा, ‘कल आपने गलत व्यवहार कर दिया.’ यह सुनकर आसपास मौजूद नेताओं की हंसी छूट गई. वहां सोनिया गांधी भी मौजूद थीं. वे भी हंसने लगीं. फिर राहुल और दिग्विजय के बीच थोड़ी देर बातचीत हुई.
क्या राहुल गांधी को दिग्विजय सिंह चुनौती दे रहे हैं?
कांग्रेस संगठन में सुधार की मांग करके एक तरह से के सी वेणुगोपाल पर तीखा हमला दिग्विजय सिंह ने किया. संगठन में सभी स्पष्ट जानते हैं कि के सी वेणुगोपाल, राहुल गांधी की पसंद हैं. तो क्या राहुल गांधी को दिग्विजय सिंह चुनौती दे रहे हैं? दूसरी सतही लेकिन चर्चा यह भी है कि क्या खत्म हो रहे राज्यसभा के कार्यकाल को फिर दोबारा जाने के लिए प्रैशर पॉलिटिक्स है?
मेरा स्पष्ट मानना है कि दिग्विजय सिंह के बयान को लेकर चल रही यह दोनों चर्चा बेकार है. वक्त का पहिया पीछे ले जाइए याद करिए दिग्विजय सिंह का कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के दौरान किस किरदार में थे? अशोक गहलोत, मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर की चल रही चर्चा के बीच दिग्विजय सिंह गांधी परिवार के सधे हथियार के रूप में काम आए. अर्थात इससे आप यह समझ सकते हैं कि आज भी गांधी परिवार के लिए दिग्विजय सिंह का क्या महत्व है? तो ऐसी परिस्थिति में क्या यह संभावना नहीं बनती है कि केसी वेणुगोपाल की बिदाई की पटकथा राहुल गांधी दिग्विजय सिंह के सवालों के सहारे करना चाहते हों? इस तरह दिग्विजय सिंह के सवालों से केसी वेणुगोपाल के विरोधी भी संतुष्ट और लगातार कांग्रेस की हार की जिम्मेदारी भी केसी वेणुगोपाल की बिदाई से ठंडे बस्ते में चली जाएगी!
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दिग्विजय सिंह का कहना है कि भाजपा-संघ से मुकाबला करने के लिए वार्ड स्तर पर हमारा संगठन मजबूत होना चाहिए. साथ ही संगठन का विकेंद्रीकरण होना चाहिए. उनका इशारा यह था कि किसी एक के हाथ में सारी पावर न हो. इस समय संगठन का सारा काम महासचिव केसी वेणुगोपाल पर ही है तो इशारा भी उन पर सीधा था. वेणुगोपाल राहुल के करीबी हैं. कुछ लोग अब इसे दिग्विजय VS वेणुगोपाल की फाइट भी कह रहे हैं. चर्चा है कि दोनों के बीच में उस दिन बहस भी हुई थी. सच जो भी हो, कांग्रेस आलाकमान इसे ज्यादा तूल नहीं दे रहा है.
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कांग्रेस नेताओं ने दिग्विजय सिंह की आलोचना की
दिग्विजय सिंह के पोस्ट के बाद पार्टी के भीतर उनकी आलोचना होने लगी. उधर, कांग्रेस स्थापना दिवस के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दिग्विजय का नाम लिए बिना कहा- कांग्रेस ने कभी संविधान, धर्मनिरपेक्षता और गरीबों के अधिकारों से समझौता नहीं किया है.
खड़गे ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने कभी धर्म के नाम पर वोट नहीं मांगे और न ही मंदिर-मस्जिद के नाम पर नफरत फैलाई. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने दिग्विजय के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि कांग्रेस को गोडसे की विचारधारा से जुड़े संगठन से कुछ सीखने की जरूरत नहीं है.
कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने कहा- RSS नफरत के आधार पर बना एक संगठन है और यह नफरत फैलाता है. नफरत से कुछ सीखने को नहीं मिलता.



















