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Turkman Gate : दिल्ली का मुगल युगीन द्वार, इतिहास, निर्माण और 1976 की विवादास्पद बेदखली

Turkman Gate: Delhi's Mughal-era gate, history, construction and controversial eviction in 1976

नई दिल्ली। पुरानी दिल्ली के हृदय में बसा तुर्कमान गेट केवल एक भव्य मुगलकालीन द्वार नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास का एक जीवंत साक्ष्य है। लाल बलुआ पत्थरों से सजा यह द्वार न सिर्फ शाहजहांनाबाद शहर की भव्यता दर्शाता है, बल्कि 1976 की इमरजेंसी के दौरान हुए क्रूर बेदखली आंदोलन का भी दुखद गवाह रहा। आइए जानते हैं इसके निर्माण, इतिहास और उस विवादास्पद घटना के बारे में जो आज भी लोगों के जेहन में ताजा है।

भव्य निर्माण: शाहजहां का गौरव, सूफी संत का सम्मान

तुर्कमान गेट का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहां ने 1650 ईस्वी के आसपास करवाया था, जब उन्होंने शाहजहांनाबाद शहर बसाया। यह शहर की 14 प्रमुख द्वारों में से एक था, जो ऊंची दीवारों से घिरा शहर सुरक्षित रखता था।

  • नामकरण: द्वार सूफी संत हजरत शाह तुर्कमान बियाबानी के नाम पर पड़ा, जिनका मकबरा पास ही स्थित है। संत 13वीं सदी के थे और कुतुबुद्दीन ऐबक व इल्तुतमिश के समकालीन माने जाते हैं।​​
  • वास्तुकला: टुगलक शैली की मोटी दीवारें, रक्षात्मक मेहराबें और लाल बलुआ पत्थर। मूल रूप से इसमें दो छोटे द्वार भी थे – लाहौरी गेट और कोतवाल गेट।

यह द्वार व्यापारियों, यात्रियों और सूफी भक्तों का प्रमुख मार्ग था, जो जामा मस्जिद की ओर जाता था।

1976 इमरजेंसी: बेदखली का काला अध्याय

तुर्कमान गेट का इतिहास तब खून से रंग गया जब 13-19 अप्रैल 1976 को इंदिरा गांधी की इमरजेंसी के दौरान संजय गांधी ने “झुग्गी-झोपड़ी हटाओ” अभियान चलाया।

विवाद के प्रमुख बिंदु:

  • संजय का आदेश: “मुझे तुर्कमान गेट से जामा मस्जिद साफ दिखनी चाहिए।” इससे बीच की बस्तियां हटाने का लक्ष्य।
  • बुलडोजर कार्रवाई: दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने बेघर करने के लिए घर-दुकानें ढाहीं। हजारों लोग सड़क पर।
  • फायरिंग और मौतें: विरोध पर पुलिस ने गोलीबारी की। आधिकारिक आंकड़ा 6-9 मौतें, लेकिन अनौपचारिक रूप से सैकड़ों।
  • मीडिया सेंसरशिप: पूर्ण ब्लैकआउट। शाह कमीशन ने इसे सरकारी दमन का प्रतीक बताया।

आज का तुर्कमान गेट: इतिहास और विवाद का संगम

आज तुर्कमान गेट पुरानी दिल्ली की जीवंतता का प्रतीक है – चहल-पहल, खाने की दुकानें और सूफी दरगाह। लेकिन हर कोने से 1976 का दर्द झांकता है। यह स्थान लोकतंत्र के काले अध्याय की याद दिलाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य:

विशेषताविवरण
निर्माण1650 ईस्वी, शाहजहां 
सामग्रीलाल बलुआ पत्थर 
विवाद1976 इमरजेंसी बेदखली 
स्थानपुरानी दिल्ली, जामा मस्जिद के पास 

तुर्कमान गेट सिर्फ एक द्वार नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और राजनीतिक संघर्ष का जीवंत दस्तावेज है।

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