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Shambhu Hostel Case: ‘शैतान प्रभात अस्पताल’ से भी 10 सवाल

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Shambhu Girls Hostel: सुरक्षा के लिए सरकार की राह देख रहे बिहार के लोगों का भरोसा टूट गया है । सरकार और आम जनता के बीच की भरोसे की दीवार भरभरा रही है। नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म और फिर रहस्यमयी मौत के मामले में बिहार पुलिस को आखिरकार अपनी ही कतार में झांकना पड़ा। चित्रगुप्तनगर थाना कांड संख्या 14/26 में सामने आई गंभीर पुलिसिया कोताही के बाद दो अफसरों पर गाज गिरी है। अपर थानाध्यक्ष कदमकुआं, अवर निरीक्षक हेमंत झा और चित्रगुप्तनगर की थानाध्यक्ष अवर निरीक्षक रोशनी कुमारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

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Shambhu Hostel Case: ‘शैतान प्रभात अस्पताल’ से भी 10 सवाल

  1. जब छात्रा के पिता या परिजन को सूचना नहीं दी गई तो बताओ कि बेहोशी की हालत में उसे अस्पताल में लेकर आया कौन था? क्या अस्पताल किसी अज्ञात व्यक्ति के कहने-लाने पर गंभीर मरीज को भर्ती कर लेता है?
  2. एक बेहोश छात्रा के मरीज रिकॉर्ड में उसका नाम, उम्र, पता और संपर्क विवरण किसने भरा? क्या यह जानकारी किसी अनजान व्यक्ति ने दी या अस्पताल ने मनमाने ढंग से दर्ज की?
  3. रजिस्ट्रेशन काउंटर पर उस छात्रा का आधार कार्ड या कोई भी पहचान दस्तावेज किस व्यक्ति ने उपलब्ध कराया? या बिना किसी वैध पहचान के ही भर्ती कर लिया गया?
  4. ICU / CRITICAL CARE शुरू करने से पहले अस्पताल ने कितनी राशि ली और वह राशि किस व्यक्ति ने जमा की? क्या उस व्यक्ति की पहचान और मरीज से उसका संबंध दर्ज किया गया?
  5. जब छात्रा नाबालिग और बेहोश अवस्था में थी तो भर्ती से पहले अस्पताल का कानूनी और नैतिक फर्ज नहीं बनता था कि उसके पिता या अभिभावक को तुरंत फोन कर सूचना दी जाए? ऐसा क्यों नहीं किया गया?
  6. इलाज के दौरान अस्पताल के रिकॉर्ड में छात्रा का केयरटेकर (Attendant) किसे दिखाया गया है? क्या वह व्यक्ति परिजन था या कोई बाहरी?
  7. क्या प्रभात मेमोरियल अस्पताल की यह नीति है कि कोई भी गैर-परिचित व्यक्ति गंभीर हालत में किसी लड़की को लाए और अस्पताल बिना पुष्टि के उसे भर्ती कर ले? अगर नहीं तो इस मामले में नियम क्यों तोड़े गए?
  8. छात्रा चार दिनों तक अस्पताल में भर्ती रही और इस दौरान वह होश में भी आई– क्या इस दौरान अस्पताल ने पुलिस को सूचना देकर उसका बयान दर्ज करवाया?
  9. अगर पुलिस को बयान नहीं दिलवाया गया तो क्यों? जबकि एक अकेली बेहोश छात्रा, संदिग्ध परिस्थितियों में बिना परिजनों के अस्पताल में भर्ती थी। इस स्थिति में अस्पताल का कानूनी दायित्व क्या था?
  10. छात्रा के भर्ती होने से लेकर उसकी मृत्यु तक कुल कितना अस्पताल बिल बना? यह बिल किसने चुकाया? भुगतान करने वाले व्यक्ति की पहचान और छात्रा से उसका संबंध क्या है?
  11. छात्रा गरीब घर की थी। चार दिन तक ICU में रखकर इलाज करने का खर्च तो लाखों में होगा। क्या तुम्हारा अस्पताल इतना उदार है कि किसी मरीज की हैसियत जाने बिना एकदम आसानी से भर्ती कर लेता है?

अरविंद शर्मा ( वरिष्ठ पत्रकार)

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