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Lakhisarai “हनुमान चालीसा वंदन से गूंजा अशोकधाम, मोरारी बापू ने कहा– मानस मातृमयी सद्ग्रंथ

Lakhisarai "Ashokdham resonated with Hanuman Chalisa, Morari Bapu said – Manas is a motherly holy book.

लखीसराय (बिहार)। बिहार के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर विशेष पहचान रखने वाले अशोक धाम मंदिर परिसर में इन दिनों आध्यात्मिक उल्लास और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। यहां चल रही नौ दिवसीय मानस श्रृंगीऋषि श्रीराम कथा के दूसरे दिन रविवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह नौ बजे से ही कथा पंडाल पूरी तरह भक्तों से भर गया।

सुबह 10 बजे जैसे ही राष्ट्रसंत श्री मोरारी बापू ने आसन ग्रहण किया, पूरा वातावरण भावविभोर हो उठा। बापू ने हनुमान चालीसा वंदन से कथा का शुभारंभ किया। भक्तों की हजारों की भीड़ ने एक स्वर में “जय सियाराम” और “पवनपुत्र हनुमान की जय” का घोष कर पूरे वातावरण को भक्तिरस से भर दिया।

श्री मोरारी बापू ने कहा: “मानस मातृमयी सद्ग्रंथ है, श्रीराम की महिमा का मूल्यांकन असंभव”

अपने ओजस्वी प्रवचन में श्री मोरारी बापू ने कहा कि रामचरितमानस कोई साधारण ग्रंथ नहीं है — यह मातृमयी, जीवनमूल्य और मानवता से ओतप्रोत ग्रंथ है। उन्होंने कहा, “मानस का मूल्यांकन कोई नहीं कर सकता। मैं वर्षों से कथा सुना रहा हूं, फिर भी अब तक मानस के गूढ़ अर्थों में पूरी तरह उतर नहीं पाया। जैसे आकाश की कोई सीमा नहीं होती, वैसे ही श्रीराम की महिमा और उनके चरित्र का विस्तार भी असीम है।”

बापू ने बताया कि रामायण स्त्री प्रधान ग्रंथ है, जिसमें मातृत्व, करूणा और नारी शक्ति सर्वोपरि हैं। उन्होंने कहा—
“अनुसूया पतिव्रता का प्रतीक हैं, शबरी गुरुव्रता की प्रतिमूर्ति हैं, और सूर्पनखा वासना की चेतावनी है।”
उन्होंने पांच सतियों — तारा, अहिल्या, कुंती, द्रौपदी और मंदोदरी — का स्मरण कराते हुए कहा कि इनका स्मरण करने मात्र से आत्मशुद्धि होती है और पापों का नाश होता है।

श्रृंगीऋषि के तीन महत्व और कथा दर्शन

बापू ने कथा के बालकांड खंड में श्रृंगीऋषि के तीन मुख्य महत्वों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रृंगीऋषि केवल ऋषि नहीं, बल्कि भक्ति, विनम्रता और अनुशासन के प्रतीक हैं।
उन्होंने बताया कि वशिष्ठ मुनि द्वारा पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाने हेतु श्रृंगीऋषि को बुलाया गया था, जिसने भगवान श्रीराम के अवतरण का मार्ग प्रशस्त किया।

बापू ने कहा कि कर्मकांड में भक्ति का समावेश आवश्यक है। कर्मकांड अगर केवल क्रिया रह जाए और उसमें भाव न हो, तो वह यांत्रिक बन जाता है। भक्ति ही कर्मकांड को जीवन प्रदान करती है। उन्होंने समझाया कि “भक्ति किसी को जीवित करने का भाव है, जबकि अहंकार बलिदान लाता है।”

साथ ही उन्होंने कहा कि पुत्र कामना को शुभ माना गया है क्योंकि इसमें सृजन का भाव निहित होता है। ऐसी कामना समाज की निरंतरता और प्रेम का प्रतीक होती है, न कि स्वार्थ या दंभ का।

आयोजिन स्थल पर उमड़ी भीड़, भक्ति और अनुशासन का संगम

लखीसराय जिले के अशोक धाम परिसर में आयोजित इस पावन कथा में दूसरे दिन हजारों श्रद्धालु कतारबद्ध बैठकर कथा श्रवण करते दिखे। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सभी पावन भक्ति में डूबे नजर आए।

कथा के दौरान बापू के प्रवचनों के बीच-बीच में जब भी “जय सियाराम” के उद्घोष होते, पूरा पंडाल गूंज उठता। मंच के दोनों ओर रामचरितमानस और श्रृंगीऋषि के चित्र स्थापित कर सुंदर फूलों से सजावट की गई थी।

डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा और डीएम मिथिलेश मिश्र ने किया आशीर्वाद ग्रहण

द्वितीय दिवस की कथा के दौरान बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं स्थानीय विधायक विजय कुमार सिन्हा और जिला अधिकारी मिथिलेश मिश्र विशेष अतिथि के रूप में पहुंचे। उन्होंने श्री मोरारी बापू के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया और आयोजन समिति की सराहना की।
दोनों गणमान्य अतिथियों ने कहा कि लखीसराय को ऐसा आध्यात्मिक आयोजन गौरव प्रदान करता है और यह स्थायी पर्यटन की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

प्रशासन और आयोजन समिति की सुदृढ़ व्यवस्था

कथा के समुचित संचालन के लिए जिला प्रशासन ने सख्त सुरक्षा और सुविधा व्यवस्था सुनिश्चित की।
नोडल पदाधिकारी मृणाल रंजन के नेतृत्व में विधि-व्यवस्था, यातायात, स्वास्थ्य, पेयजल तथा स्वच्छता की मजबूत तैयारी की गई थी।
आयोजन में शुभकरण त्रिवेणी फाउंडेशन कोलकाता और इंद्रद्मनेश्वर महादेव मंदिर अशोक धाम ट्रस्ट की अहम भूमिका रही।
फाउंडेशन से नवल कानोडिया, निर्मल कानोडिया और अभिषेक कनोडिया लगातार पंडाल की व्यवस्थाओं में जुटे रहे, जबकि ट्रस्ट की ओर से डॉ. कुमार अमितडॉ. प्रवीण कुमार सिंहा और राजेंद्र प्रसाद सिंघानिया सक्रिय रूप से प्रबंधन में लगे थे।

बापू ने कहा कि कथा पंचाग्नि के समान है — यह मनुष्य के भीतर विवेक, भावना, संवेदना, तप और प्रेम की अग्नि प्रज्वलित करती है।
उन्होंने कहा कि “कथा वियोग देती है, एक कथा समाप्त होती है तो दूसरी कथा सुनने की लालसा बढ़ती है। यही कथा का जीवन है।”
मोरारी बापू के इन शब्दों पर उपस्थित सभी श्रोतागण सन्निहित भाव में तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठे।

11 जनवरी तक चलेगी मानस श्रृंगीऋषि श्रीराम कथा

यह सुप्रसिद्ध मानस श्रृंगीऋषि श्रीराम कथा 3 जनवरी से प्रारंभ होकर 11 जनवरी 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक आयोजित की जा रही है।
श्रृंगीऋषि की तपोभूमि को केंद्र में रखकर मोरारी बापू इस कथा के माध्यम से राम के जीवन दर्शन, मर्यादा पुरुषोत्तम के आदर्श और समाज में नैतिकता एवं समानता का संदेश दे रहे हैं।
श्रद्धालु भक्तों में कथा को लेकर गहरा उत्साह है और अगले दिनों में और बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।

रिपोर्ट: कृष्णदेव प्रसाद यादव, लखीसराय

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