Advertisement

शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाना Rape है या नहीं?

LoveTips

Love Marriage : घर में है बेटी तो पढ़ लीजिए यह जरूरी खबर

भारत में दो तरह की खबरें खूब सामने आती हैं- 1. शादी का झांसा देकर यौन उत्पीड़न, और 2. प्रेमी के साथ भागकर शादी रचाई। ऐसे मामले किसी एक राज्य तक सीमित नहीं। हर राज्य की यह हालत है। भारत में लड़कियों से जुड़ी यह खबरें पढ़ी भी खूब जाती हैं। लेकिन, मामला जिस परिवार से जुड़ा है या जिस लड़की से; उसपर क्या बीतती है- अंदाजा लगाना मुश्किल है। ऐसे ही दो प्रसंगों पर पटना हाईकोर्ट का फैसला अब नज़ीर के रूप में पेश किया जाएगा। किसी भी राज्य की किसी अदालत में इसका जिक्र हो सकता है, क्योंकि दोनों ही मामलों के सु्प्रीम कोर्ट जाने की कोई संभावना नहीं। भारत के जिस घर में लड़की है, उसके परिवार के लिए यह खबर मायने रखेगी। साथ ही, भरोसे में सबकुछ लुटाकर खाली हाथ रहने वाली लड़कियों के लिए।

फैसला- 1 : शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाना दुष्कर्म है या नहीं?

पटना हाईकोर्ट के जिन दो फैसलों की चर्चा हो रही है, उसमें एक बड़ा फैसला शादी और दुष्कर्म से जुड़ा है। मंगलवार को पटना हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए युवक को दोषमुक्त करार दिया। निचली अदालत ने उसे दोषी माना था। लेकिन, पटना हाईकोर्ट में न्यायाधीश सोनी श्रीवास्वत की एकलपीठ ने धारा 376 के तहत दर्ज मुकदमे को निराधार घोषित किया। कोर्ट ने भागलपुर के अपर सत्र न्यायाधीश के आदेश को निरस्त करते हुए अपने फैसले में कहा कि झूठा वादा करना और विवाह का पूरा न हो पाना दो अलग बाते हैं। परिस्थितिवश विवाह नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि इसके पहले विवाह का वादा कर आपसी सहमति से दो वयस्कों का शारीरिक संबंध बनाना दुष्कर्म करार दिया जाए। सहमति से बने संबंधों के विफल हो जाने पर उसे दुष्कर्म जैसे संगीन अपराध का दोषी बताया जाना गलत है। आरोप तय करते समय अगर जबरदस्ती का सबूत नहीं है तो आरोपी को बरी किया जाना चाहिए। मतलब, शादी के वादे पर लड़की अगर शरीर सौंपती है तो बाद में उसपर दुष्कर्म का मामला नहीं बनेगा।

RelationshipAdvice: क्या एक से ज्यादा रिलेशन सही हैं?
Body Detox: सिगरेट छोड़ना है आसान, ये तरीके अपनाएं

फैसला- 2 : पिता का बेटी पर हक नहीं बचता, अगर…

पटना हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक और बड़ी बात कही। जिस मामले में यह बात कही गई, उसकी सुनवाई आगे भी जारी रहेगी। लेकिन, चर्चा में हाईकोर्ट की एक बात है। दरअसल, न्यायमूर्ति सुधीर सिंह और न्यायमूर्ति रितेश कुमार की खंडपीठ ने एक युवक की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि अगर कोई बालिग युवती अपनी मर्जी से किसी से शादी कर ले तो उसे अपने पास जबरन रखने का पिता को कोई हक नहीं बचता है। पिछले महीने की तीन तारीख को युवक ने नालंदा की एक युवती को भगाकर उससे शादी कर ली थी। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद लड़की को बरामद कर उसे पिता को सौंप दिया। युवक का आरोप है कि उसके बाद से उसकी पत्नी का कोई पता नहीं चल पा रहा। दोनों के बालिग होने का प्रमाण देखने के बाद कोर्ट ने कहा कि दो बालिग की शादी से रोकना या विवाह के बाद बेटी को जबरन अपने पास रखना पिता का भी हक नहीं है।