Vaibhav Suryavanshi : वैभव सूर्यवंशी अभी हर जगह छाए हुए हैं. जिस उम्र में बच्चे सपने देखना शुरू करते हैं, उसी उम्र में एक नाम इतिहास लिख रहा है. क्रिकेट के मैदान पर बल्ले से तूफान मचाने वाला किशोर वैभव सूर्यवंशी अब राष्ट्रपति भवन तक पहुंच चुका है. वैभव सूर्यवंशी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने हाथों से सम्मानित किया है. आइए जानें कि इस पुरस्कार में कितना कैश मिलता है.
वीर बाल दिवस पर खास सम्मान
वीर बाल दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को देश के 20 असाधारण बच्चों को ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से सम्मानित किया. ये बच्चे 18 अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चुने गए हैं. इन्हीं में एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा बिहार के 14 वर्षीय क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी. राष्ट्रपति ने स्वयं अपने हाथों से वैभव को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया, जिससे यह पल उनके जीवन का सबसे यादगार क्षण बन गया.
किन बच्चों को मिलता है यह पुरस्कार
यह पुरस्कार उन भारतीय बच्चों को दिया जाता है जिनकी उम्र 5 साल से अधिक और 18 साल से कम होती है और जो भारत में निवास करते हैं. इनका चयन महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा किया जाता है. पुरस्कार पाने वाले बच्चों को गणतंत्र दिवस पर कर्तव्यपथ पर होने वाली परेड में शामिल होने का भी अवसर मिलता है.
अवॉर्ड की कैटेगरी और मिलने वाला कैश
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार पहले छह कैटेगरी में दिया जाता था, जिनमें कला और संस्कृति, बहादुरी, नवाचार, शिक्षा, सामाजिक सेवा और खेल शामिल थे. अब इसमें साइंस और टेक्नोलॉजी को भी जोड़ा गया है. इस पुरस्कार के तहत विजेता को एक मेडल, एक प्रमाण पत्र और 1 लाख रुपये की नकद राशि दी जाती है.
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रिकॉर्ड्स जिसने दुनिया को चौंकाया
वैभव सूर्यवंशी ने अपने खेल से न सिर्फ भारतीय क्रिकेट प्रेमियों, बल्कि दुनिया भर के पूर्व क्रिकेटरों को हैरान कर दिया है. आईपीएल में उन्होंने महज 35 गेंदों में शतक जड़कर तहलका मचा दिया था. वहीं विजय हजारे ट्रॉफी में वैभव ने केवल 36 गेंदों में शतक लगाकर इतिहास रच दिया. अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ खेले गए मैच में उन्होंने 84 गेंदों पर 190 रनों की विस्फोटक पारी खेली. लिस्ट-ए क्रिकेट में वह सबसे तेज शतक लगाने वाले भारत के तीसरे बल्लेबाज बन चुके हैं.
राष्ट्रपति सम्मान के बाद पीएम से मुलाकात
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार मिलने के बाद वैभव सूर्यवंशी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे. यह मुलाकात न सिर्फ वैभव के लिए, बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए भी एक बड़ा संदेश मानी जा रही है कि प्रतिभा और मेहनत को देश के सर्वोच्च स्तर पर पहचाना जाता है.
क्या है वीर बाल दिवस का महत्व
वीर बाल दिवस हर साल 26 दिसंबर को मनाया जाता है. यह दिन गुरु गोविंद सिंह के चार साहिबजादों- अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह की शहादत को समर्पित है. 26 दिसंबर 1705 को मुगल सेना ने इन चारों वीर बालकों की हत्या कर दी थी. उनकी वीरता और बलिदान की याद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2022 में 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी.
लोग उनके बारे में अब जानना चाहते हैं. सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग उनकी ‘कास्ट’ के बारे में सवाल पूछ रहे हैं, वह जानना चाहते हैं कि सूर्यवंशी किस जाती के हैं?
वैभव सूर्यवंशी का जन्म 24 मार्च 2011 को भारत के बिहार के समस्तीपुर जिले के मोतीपुर गांव में हुआ था. 4 साल की छोटी सी उम्र में उन्होंने बल्ला थाम लिया था. करीब 5 साल तक अपने पिता के साथ क्रिकेट खेलने वाले वैभव ने 9 साल की उम्र में क्रिकेट एकेडमी ज्वाइन की. वह क्रिकेट के गुर सीखने पटना जाते थे.

वैभव सूर्यवंशी की कास्ट
वैभव सूर्यवंशी का कास्ट सूर्यवंशी है, जो कि एक राजपूत राजवंश है जिसकी उत्पत्ति भगवान सूर्य से मानी जाती है.
उन्होंने अपने ऐतिहासिक शतक के बाद अपनी सफलता के लिए क्रेडिट अपने माता पिता को दिया. उन्होंने कहा, “मैं जो कुछ भी हूं, अपने माता-पिता की वजह से हूं. मेरी मां मेरी ट्रेनिंग के लिए 11 बजे सोने के बाद सुबह 2 बजे उठती हैं और मुश्किल से 3 घंटे सो पाती हैं. इसके बाद वह मेरे लिए खाना बनाती हैं. मेरे पिता ने मेरा साथ देने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी. मेरे बड़े भाई अपना काम संभाल रहे हैं और घर बड़ी मुश्किल से चल रहा था. लेकिन पापा मेरा साथ दे रहे हैं.”
IPL में रचा इतिहास
वैभव ना सिर्फ आईपीएल बल्कि टी20 क्रिकेट में शतक जड़ने वाले सबसे कम उम्र के प्लेयर बन गए हैं. वह इंडियन प्रीमियर लीग के इतिहास में सबसे तेज शतक लगाने वाले भारतीय बन गए हैं. उनसे आगे अब सिर्फ क्रिस गेल हैं, जिन्होंने 30 गेंदों में शतक जड़ा था.
वैभव सूर्यवंशी को राजस्थान रॉयल्स ने आईपीएल ऑक्शन में 1.1 करोड़ रूपये में ख़रीदा था, उनका बेस प्राइस 30 लाख रुपये थे. उनके इस शतक के बाद बिहार सरकार ने उनके लिए 10 लाख रुपये इनामी राशि की घोषणा की थी.
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