भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर के कार्यकाल ने कई मोर्चों पर निराशा ही दी है, जहां विवाद, खराब प्रदर्शन और सांख्यिकीय आंकड़े सब चिंता बढ़ा रहे हैं। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2024 से शुरू हुआ यह दौर भारतीय क्रिकेट के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है, जिसमें घरेलू हारें और आंतरिक कलह ने टीम को कमजोर कर दिया। विशेषज्ञ इसे ग्रेग चैपल युग की याद दिलाता है, जहां कोच और कप्तान के बीच तनाव ने टीम को प्रभावित किया।
प्रमुख विवादों का दौर
गंभीर के कोचिंग काल में कई बड़े विवाद सामने आए, जो मीडिया और फैंस के बीच चर्चा का विषय बने।
- कोचिंग स्टाफ में मोर्ने मोर्कल और रयान टेन डोश्चेटे जैसे दक्षिण अफ्रीकी कोचों को शामिल करना विवादास्पद रहा, क्योंकि कईयों ने भारतीय कोचों को प्राथमिकता की मांग की।
- ड्रेसिंग रूम से जानकारी लीक होने के आरोप लगे, खासकर सरफराज अहमद पर मीडिया को टीम की बातें बताने का इल्जाम लगा, जिससे आंतरिक विश्वास पर सवाल उठे।
- विराट कोहली के साथ पुराना विवाद फिर सुर्खियों में आया, जहां गंभीर की आलोचना ने ड्रेसिंग रूम में तनाव बढ़ाया। न्यूज18 ने इसे तीन बड़े विवादों में शुमार किया।
- मीडिया बायस पर गंभीर की खुली आलोचना, जहां उन्होंने कहा कि सभी खिलाड़ियों को बराबर महत्व मिलना चाहिए, IPL स्टारों को अतिरिक्त तवज्जो न मिले।
प्रदर्शन में ऐतिहासिक गिरावट
टीम का प्रदर्शन घरेलू और विदेशी मैदानों पर शर्मनाक रहा, जो गंभीर के आक्रामक स्टाइल के बावजूद सुधार नहीं ला सका।
- न्यूजीलैंड के खिलाफ घर पर टेस्ट सीरीज हारना पहली बार हुआ, जो 50 सालों में सबसे बड़ी शर्मिंदगी थी।
- दक्षिण अफ्रीका दौरे पर 2-0 से सफेद धागा हार, जहां गंभीर ने खुद कहा, “जिम्मेदारी मेरी है।” इंडियन एक्सप्रेस ने इसे कोच की नाकामी बताया।
- बल्लेबाजी लाइनअप चरमरा गया, टॉप ऑर्डर का औसत 30 से नीचे, स्पिन गेंदबाजी भी कमजोर। रेडिट चर्चाओं में इसे “गंभीर युग का पतन” कहा गया।
- रोहित शर्मा और विराट कोहली की फॉर्म गिरावट ने युवाओं पर दबाव बढ़ाया, लेकिन ट्रांजिशन सुचारू नहीं हो सका।
सांख्यिकीय आंकड़ों की चेतावनी
आंकड़े साफ बता रहे हैं कि टीम संकट में है, जो सुधार की मांग कर रहे हैं।
| श्रेणी | आंकड़ा | तुलना (पिछले कोच के साथ) |
|---|---|---|
| टेस्ट जीत % | 25% | 60% (द्रविड़ युग) |
| टॉप ऑर्डर औसत | 28.5 | 42+ (2023 तक) |
| घरेलू हारें | 3 सीरीज | शून्य (पिछले 10 साल) |
| विवादों की संख्या | 5+ | न्यूनतम (पिछले कोच) |
बीसीसीआई ने घरेलू क्रिकेट अनिवार्य किया, परिवार यात्राओं पर रोक लगाई और स्टार कल्चर खत्म करने की कोशिश की। टेलीग्राफ इंडिया ने चैपल युग से तुलना की, जहां कोच-कप्तान फ्रिक्शन ने टीम तोड़ी।
विशेषज्ञों की राय और भविष्य
विशेषज्ञ मानते हैं कि गंभीर का सख्त रवैया लंबे समय में फायदा दे सकता है, लेकिन ड्रेसिंग रूम की एकता जरूरी।
- युवा खिलाड़ियों को मौका देकर स्टार्स पर निर्भरता कम करें, जैसा गंभीर ने दिल्ली में किया था।
- अगले चक्र की शुरुआत में सुधार संभव, लेकिन 2026 वर्ल्ड कप से पहले बड़ा बदलाव जरूरी।
- स्पोर्ट्सकीड़ा ने 5 विवादों को गिनाया, जो टीम की छवि खराब कर रहे हैं।
यह दौर भारतीय क्रिकेट के लिए सबक है, जहां आक्रामकता के साथ संतुलन जरूरी। गंभीर अगर ड्रेसिंग रूम संभाल लें, तो उज्ज्वल भविष्य संभव।
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