नई दिल्ली: 2026 के ICC पुरुष टी20 वर्ल्ड कप में क्रिकेट का सबसे चर्चित विरोधाभास तब उभरा है जब पाकिस्तान सरकार ने भारत के खिलाफ अपने ग्रुप मैच को खेलने से इनकार कर दिया। इस फैसले के चलते न केवल खेल का रोमांच प्रभावित हो रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के बीच एक बड़ा आर्थिक विवाद भी खड़ा हो गया है।
भारत-पाकिस्तान मैच की आर्थिक क़ीमत
आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक, ICC के किसी भी मैजर इवेंट में **भारत-पाकिस्तान मैच से लगभग $25 करोड़ डॉलर (लगभग ₹2,288 करोड़) का राजस्व होता है। इसमें विज्ञापन, ब्रॉडकास्टिंग राइट्स और प्रायोजक शामिल होते हैं। अगर यह मैच नहीं हुआ तो ICC, मीडिया पार्टनर्स और बोर्डों को भारी घाटा उठाना पड़ेगा।
ICC का सख़्त रुख
ICC ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर पाकिस्तान भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलता तो उसे आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए PCB से जुर्माना वसूला जा सकता है। इस तरह का जुर्माना मैच-सम्बंधित राजस्व के आधार पर लगाया जा सकता है, जिसमें पूरी टूर्नामेंट ईकोनॉमी शामिल होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले से न सिर्फ ICC को नुक़सान होगा, बल्कि भारतीय मीडिया अधिकार धारक जियोस्टार जैसे ब्रॉडकास्ट पार्टनर्स को भी विज्ञापन से जुड़े बड़े नुकसान का सामना करना पड़ेगा।
मैच की राजनीति और क्रिकेट
पाकिस्तान सरकार के फैसले का असर साफ़ दिखता है — इस फैसले के बाद भारत को वॉकओवर से दो अंक मिलेंगे, लेकिन पाकिस्तान बोर्ड पर वित्तीय जुर्माने और आलोचना का खतरा भी मंडरा रहा है। ICC ने कहा है कि ऐसे “चयनात्मक भागीदारी” के फैसले क्रिकेट की मूल भावना के खिलाफ हैं।
यह विवाद खेल से निकलकर राजनीति और आर्थिक ताक़त के टकराव का रूप ले चुका है। कई मौकों पर पाकिस्तान ने पहले भी राजनीतिक तनाव के कारण क्रिकेट से दूरी बनाई है, लेकिन इस बार ICC की चेतावनी आर्थिक दांव-पेंचों तक पहुंच गया है।
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