पुडुचेरी में खेल रहे अंडर-23 घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान दिल्ली टीम के दो युवा क्रिकेटरों के खिलाफ एक नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ (molestation) का गंभीर आरोप लगा है, जिससे खेल जगत में चर्चा फैल गई है। यह मामला न सिर्फ खिलाड़ियों की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर रहा है बल्कि डीसीसीए (दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ) के अनुशासनात्मक प्रबंधन पर भी गंभीर चिंताएँ बढ़ा रहा है।
DDCA की प्रतिक्रिया
दिल्ली और जिला क्रिकेट एसोसिएशन (DDCA) ने कहा है कि वे इस मामले को लेकर तत्काल जांच शुरू कर चुके हैं। हालांकि संघ के एक अधिकारी का दावा है कि छेड़छाड़ की बात “अनुशासनहीनता” के रूप में शुरू हुई थी, जिसमें खिलाड़ियों के होटल रूम में तेज आवाज में संगीत बजाने जैसे व्यवहार शामिल थे — और उन्होंने कहा कि “किसी नाबालिग के साथ छेड़छाड़ की पुष्टि अभी आधिकारिक रूप से नहीं हुई है।”
DDCA के सह-सचिव अमित ग्रोवर ने यह भी कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो “कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी” ताकि किसी भी प्रायोगिक छूट का जोखिम न रहे।
क्या होगा अब?
यह मामला कानूनी तौर पर गंभीर माना जा सकता है क्योंकि नाबालिग के साथ छेड़छाड़ जैसे आरोपों पर पुलिस जांच और POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) Act जैसी धाराओं के तहत मामला दर्ज होने की संभावनाएँ होती हैं। जांच अधिकारियों को इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि आरोप सबूतों के आधार पर स्थापित हों, और यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो आरोपी खिलाड़ियों के खिलाफ उचित कार्रवाई लागू हो।
खेल और अनुशासन
इस तरह के आरोप न सिर्फ टीम के प्रतिष्ठा और अनुशासन पर प्रश्न उठाते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि खेल जगत में खिलाड़ियों के व्यवहार और सुरक्षा मानकों पर निगरानी कितनी महत्वपूर्ण है। खेल संघों और अधिकारियों दोनों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति बन सकती है कि वे न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करें।
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