Advertisement

RelationshipGoals: आज की पीढ़ी को सिंगल रहना ज्यादा क्यों पसंद आ रहा है?

ModernRelationships

RelationshipGoals: शादी और रिश्तों को जीवन का अनिवार्य पड़ाव मानने वाली भारतीय सोच में तेज़ी से बदलाव आ रहा है. खासकर शहरी युवाओं में सिंगल रहना अब मजबूरी नहीं, बल्कि एक सोचा-समझा विकल्प बनता जा रहा है. यह बदलाव केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और मानसिक कारणों से जुड़ा है.

Moradabad: नकली शराब फैक्ट्री का भंडाफोड़! 5 गिरफ्तार, भारी मात्रा में शराब बरामद

करियर और आत्मनिर्भरता पहली प्राथमिकता
आज की पीढ़ी करियर, शिक्षा और आत्मनिर्भरता को रिश्तों से पहले रख रही है. लंबे कार्य घंटे, प्रतियोगिता और खुद को स्थापित करने की दौड़ में युवा शादी को टालना या उससे दूरी बनाए रखना बेहतर समझते हैं.

आज़ादी और व्यक्तिगत स्पेस की चाह
युवाओं के लिए व्यक्तिगत स्वतंत्रता और स्पेस बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं. कई लोग मानते हैं कि शादी या रिश्तों में समझौते ज़्यादा होते हैं, जबकि सिंगल जीवन निर्णय लेने की पूरी आज़ादी देता है.

टूटते रिश्तों का डर
बढ़ते तलाक़, ब्रेकअप और रिश्तों की अस्थिरता ने युवाओं को सतर्क बना दिया है. भावनात्मक चोट और असफल रिश्तों के अनुभव के कारण कई युवा कमिटमेंट से बचना ही सुरक्षित मानते हैं.

सोशल मीडिया और बदलती अपेक्षाएं
सोशल मीडिया ने रिश्तों को लेकर अपेक्षाएं बढ़ा दी हैं, परफेक्ट लाइफ और परफेक्ट पार्टनर की तुलना में कई लोग खुद को असंतुष्ट महसूस करते हैं, जिससे वे सिंगल रहकर मानसिक शांति को प्राथमिकता देते हैं.

मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता
आज की पीढ़ी मानसिक स्वास्थ्य को पहले से ज़्यादा महत्व दे रही है. वे ऐसे रिश्ते नहीं चाहते जो तनाव, दबाव या असंतोष पैदा करें, यह सोच युवाओं को टॉक्सिक रिलेशनशिप से दूर रख रही है.

सामाजिक सोच में बदलाव
अब समाज में सिंगल रहना धीरे-धीरे स्वीकार किया जा रहा है, खासकर महिलाएं और पुरुष दोनों ही शादी को जीवन की एकमात्र सफलता नहीं मानते.

क्या यह गलत या सही?
सिंगल रहना न तो सही है और न गलत यह व्यक्तिगत चुनाव है. जरूरी यह है कि व्यक्ति भावनात्मक रूप से संतुलित और सामाजिक रूप से जुड़ा रहे.

इसे भी पढ़े-RelationshipTips: भारत के युवा पुरुष इतने अकेले क्यों हो रहे हैं?