ParentingAdvice: अगर आपका बच्चा पहले की तरह खुलकर बातें नहीं करता और छोटी-छोटी बातों को छिपाने लगा है, तो यह केवल आदत का बदलाव नहीं हो सकता. चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट्स के अनुसार, बच्चों का बातें छिपाना कई बार किसी अंदरूनी परेशानी या डर का संकेत होता है, ऐसे संकेतों को समय रहते समझना माता-पिता के लिए बेहद जरूरी है.
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बच्चे बातें क्यों छिपाने लगते हैं?
1. डांट या सजा का डर: बार-बार डांट या सख्ती के कारण बच्चे सच बोलने से डरने लगते हैं और बातें छिपाने लगते हैं.
2. भरोसे की कमी: अगर बच्चे को लगे कि उसकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया जाएगा, तो वह खुद को चुप रखना बेहतर समझता है.
3. स्कूल या दोस्तों से जुड़ी परेशानी: बुलिंग, पढ़ाई का दबाव या दोस्तों से तनाव भी बच्चों को अंदर ही अंदर परेशान कर सकता है.
4. ज्यादा तुलना और उम्मीदें: लगातार तुलना और ज्यादा अपेक्षाएं बच्चों में असफलता का डर पैदा करती हैं, जिससे वे बातें छिपाने लगते हैं.
5. डिजिटल दुनिया का असर: मोबाइल, गेम्स या सोशल मीडिया से जुड़ी चीजें भी बच्चे छुपा सकते हैं, खासकर जब उन्हें डांट का डर हो.
माता-पिता किन संकेतों पर ध्यान दें?
अचानक चुप रहना, अकेले रहना पसंद करना, व्यवहार में बदलाव, बात पूछने पर गुस्सा या बचाव की मुद्रा, झूठ बोलने की आदत.
एक्सपर्ट की राय
चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट डॉ. रितु अग्रवाल के अनुसार, जब बच्चे बातें छिपाने लगते हैं, तो वे असल में मदद मांग रहे होते हैं. माता-पिता का शांत और समझदारी भरा रवैया ही बच्चों को दोबारा खुलने का भरोसा देता है.
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