Kitchen gardening tips: शहरी जीवन में जगह की कमी के कारण लोग अक्सर सोचते हैं कि घर पर सब्जियां और हरे पौधे उगाना मुश्किल है, लेकिन किचन गार्डनिंग इस सोच को पूरी तरह बदल देती है. थोड़ी सी योजना और सही तकनीक अपनाकर छोटे घर या बालकनी में भी बड़ा और उपयोगी गार्डन तैयार किया जा सकता है.
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किचन गार्डनिंग क्या है?
किचन गार्डनिंग का मतलब है घर के आसपास या बालकनी में दैनिक उपयोग की सब्जियां, हर्ब्स और फल उगाना, इससे न सिर्फ ताजी और जैविक सब्जियां मिलती हैं, बल्कि सेहत और पर्यावरण दोनों को फायदा होता है.
छोटे घर में किचन गार्डनिंग के आसान टिप्स
सही जगह का चुनाव करें- बालकनी, खिड़की के पास या छत का कोना किचन गार्डन के लिए उपयुक्त होता है, पौधों को रोजाना कम से कम 4–6 घंटे धूप मिलनी चाहिए.
वर्टिकल गार्डनिंग अपनाएं- कम जगह में ज्यादा पौधे उगाने के लिए दीवारों पर हैंगिंग पॉट, शेल्फ या वर्टिकल स्टैंड का इस्तेमाल करें.
हल्के और सही गमले चुनें- प्लास्टिक, ग्रो बैग या रीसायकल बोतलों में भी सब्जियां आसानी से उगाई जा सकती हैं.
आसान सब्जियों से शुरुआत करें- टमाटर, धनिया, पुदीना, पालक, मेथी, हरी मिर्च और लौकी जैसी सब्जियां छोटे घरों के लिए बेहतर मानी जाती हैं.
अच्छी मिट्टी और खाद का इस्तेमाल- मिट्टी में गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट या किचन वेस्ट खाद मिलाने से पौधे तेजी से बढ़ते हैं.
जरूरत से ज्यादा पानी न दें- ज्यादा पानी पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है, मिट्टी सूखने पर ही पानी दें.
रसोई कचरे से बनाएं खाद- सब्जियों के छिलके और फल के बचे हिस्सों से घर पर ही कम्पोस्ट बनाकर पौधों में डालें.
कीटों से प्राकृतिक तरीके से बचाव करें- नीम तेल या हल्के घरेलू उपायों से कीटों से बचाव किया जा सकता है.
किचन गार्डनिंग के फायदे
ताजी और रसायन मुक्त सब्जियां, सब्जियों पर खर्च में कमी, मानसिक तनाव में राहत, बच्चों में प्रकृति के प्रति रुचि.
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