Mobile use in low light effects: आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन रात में या कम रोशनी में फोन इस्तेमाल करने की आदत आपकी आंखों की सेहत पर भारी पड़ सकती है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह आदत धीरे-धीरे आंखों को कमजोर बना सकती है और कई समस्याओं को जन्म दे सकती है.
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कम रोशनी में फोन चलाने के नुकसान
आंखों पर ज्यादा दबाव (Eye Strain) कम रोशनी में स्क्रीन देखने से आंखों को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे थकान और दर्द हो सकता है.
ड्राय आई (Dry Eyes) की समस्या– लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों की नमी कम हो जाती है, जिससे जलन और सूखापन महसूस होता है.
नींद पर असर- फोन से निकलने वाली ब्लू लाइट नींद के हार्मोन (मेलाटोनिन) को प्रभावित करती है, जिससे नींद की समस्या हो सकती है.
सिरदर्द और धुंधला दिखना- कम रोशनी में फोन चलाने से सिरदर्द और धुंधली दृष्टि जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं.
कैसे करें बचाव?
ब्राइटनेस सही रखें: फोन की ब्राइटनेस को आसपास की रोशनी के अनुसार एडजस्ट करें.
डार्क मोड का इस्तेमाल करें: डार्क मोड या नाइट मोड का उपयोग आंखों पर दबाव कम करता है.
सोने से पहले फोन से दूरी बनाएं: सोने से कम से कम 1 घंटे पहले फोन का इस्तेमाल बंद कर दें.
एक्सपर्ट की सलाह
जाने-माने नेत्र विशेषज्ञ डॉ. आर.पी. सिंह का कहना है कि आंखों की सेहत के लिए स्क्रीन टाइम को सीमित रखना और सही आदतें अपनाना बेहद जरूरी है. उनके अनुसार, लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करने से आंखों पर दबाव बढ़ता है, जिससे ड्रायनेस, जलन और नजर कमजोर होने का खतरा रहता है.
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