Ayurvedic Treatment For Thyroid: आज की तेज रफ्तार जिंदगी, तनाव और असंतुलित खानपान के कारण थायराइड की समस्या तेजी से बढ़ रही है. समय रहते अगर बचाव पर ध्यान न दिया जाए, तो यह हार्मोनल असंतुलन कई दूसरी परेशानियों की वजह बन सकता है. आयुर्वेद में थायराइड से बचाव (Prevention) के लिए कुछ प्राकृतिक उपाय बताए गए हैं, जिन्हें एक्सपर्ट्स सहायक मानते हैं.
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ये 5 आयुर्वेदिक उपाय
1. अश्वगंधा का सेवन
आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार अश्वगंधा शरीर में हार्मोन बैलेंस बनाए रखने में मदद करता है, यह तनाव कम करता है थायराइड ग्रंथि के कार्य को संतुलित रखने में सहायक माना जाता है.
2. त्रिफला से पाचन सुधारें
खराब पाचन भी थायराइड की एक बड़ी वजह माना जाता है, त्रिफला चूर्ण आंतों को साफ रखने में मदद करता है, मेटाबॉलिज्मि बेहतर करता है, जिससे हार्मोन संतुलन बना रहता है.
3. योग और प्राणायाम अपनाएं
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि नियमित योग अभ्यास से थायराइड का खतरा कम हो सकता है. सर्वांगासन, मत्स्यासन और भ्रामरी प्राणायाम लाभकारी माने जाते हैं, तनाव कम होने से हार्मोनल सिस्टम बेहतर काम करता है.
4. संतुलित आयुर्वेदिक आहार
आयुर्वेद के अनुसार, सही आहार थायराइड से बचाव की कुंजी है. ताजा फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज लें, बहुत ज्यादा तला-भुना, जंक फूड और रिफाइंड चीनी से बचें.
5. दिनचर्या और नींद पर ध्यान
आयुर्वेदिक एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अनियमित दिनचर्या थायराइड का जोखिम बढ़ा सकती है, रोज 7–8 घंटे की नींद लें, देर रात जागना और अनियमित भोजन से बचें.
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. नरेंद्र सिंह के अनुसार, थायराइड से बचाव के लिए दवा से ज़्यादा जरूरी है सही दिनचर्या और प्राकृतिक जीवनशैली. नियमित योग-प्राणायाम, संतुलित आयुर्वेदिक आहार और तनाव नियंत्रण से थायराइड ग्रंथि को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है. शुरुआती स्तर पर अपनाए गए आयुर्वेदिक उपाय थायराइड की समस्या को बढ़ने से रोकने में सहायक होते हैं.
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