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PanicAttack: क्या ज्यादा सोचने से आता है? जानिए

PanicAttack

HealthTips: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में ज्यादा सोचना (Overthinking) एक आम समस्या बन चुकी है. छोटी-छोटी बातों पर बार-बार सोचते रहना, भविष्य की चिंता करना या बीती बातों को दिमाग में दोहराना मानसिक तनाव बढ़ा देता है, ऐसे में अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है. क्या ज्यादा सोचने से पैनिक अटैक आ सकता है? इसका जवाब है: हां, ज्यादा सोचने से पैनिक अटैक का खतरा बढ़ सकता है.

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ज्यादा सोचने और पैनिक अटैक का कनेक्शन
जब इंसान लगातार नकारात्मक या डरावने विचारों में उलझा रहता है, तो दिमाग इसे खतरे की स्थिति मान लेता है, इससे शरीर में स्ट्रेस हार्मोन (कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन) बढ़ जाते हैं. यही हार्मोन अचानक दिल की धड़कन तेज कर देते हैं, सांस लेने में दिक्कत पैदा करते हैं और घबराहट शुरू हो जाती है. जो आगे चलकर पैनिक अटैक का रूप ले सकती है.

पैनिक अटैक के सामान्य लक्षण
अचानक तेज़ घबराहट या डर, दिल का बहुत तेज धड़कना, सांस फूलना या दम घुटने जैसा महसूस होना, पसीना आना, हाथ-पैर कांपना, चक्कर आना या नियंत्रण खोने का डर ये लक्षण कई बार इतने तेज होते हैं कि व्यक्ति को लगता है उसे हार्ट अटैक आ रहा है, जबकि असल में वह पैनिक अटैक होता है.

ज्यादा सोचने की आदत क्यों खतरनाक है
ओवरथिंकिंग दिमाग को लगातार “अलर्ट मोड” में रखती है, इससे शरीर को आराम नहीं मिलता और मानसिक थकान बढ़ती जाती है. लंबे समय तक ऐसा होने पर एंग्ज़ायटी डिसऑर्डर और पैनिक अटैक की संभावना बढ़ जाती है.

पैनिक अटैक से बचने के उपाय
सांस पर ध्यान दें: गहरी और धीमी सांसें लें
नेगेटिव सोच को रोकें: हर विचार को सच मानना जरूरी नहीं
ध्यान और योग करें: इससे दिमाग शांत रहता है
नींद पूरी लें: नींद की कमी से एंग्जायटी बढ़ती है

कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है
अगर पैनिक अटैक बार-बार आने लगे, रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही हो या डर हमेशा बना रहता हो, तो मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक से सलाह लेना जरूरी है.

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