BrainHealth: आजकल बच्चों से लेकर बड़ों तक हर कोई दिनभर मोबाइल और लैपटॉप स्क्रीन के संपर्क में रहता है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि लगातार स्क्रीन देखने से दिमाग पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. यह केवल आंखों की थकान तक सीमित नहीं है, बल्कि स्मरण शक्ति, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और मानसिक ऊर्जा पर भी प्रभाव डाल सकता है.
37 Billion Views के बावजूद बोले Tanishk Bagchi – “सब कुछ इतनी आसान नहीं”
ज्यादा स्क्रीन देखने के दिमाग पर प्रभाव
ध्यान और फोकस में कमी- लगातार स्क्रीन पर काम करने या गेम खेलने से केंद्रित ध्यान बनाए रखना मुश्किल हो जाता है.
स्मरण शक्ति पर असर- लंबे समय तक डिजिटल डिवाइस के संपर्क में रहने से याददाश्त कमजोर हो सकती है.
नींद पर प्रभाव- रात में मोबाइल या लैपटॉप का उपयोग नींद को प्रभावित करता है. नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन को कम करती है, जिससे नींद की गुणवत्ता घटती है.
मानसिक थकान और स्ट्रेस– लगातार स्क्रीन पर ध्यान देने से दिमाग जल्दी थक जाता है और स्ट्रेस बढ़ सकता है.
डाॅक्टर की राय
डॉ. अमित वर्मा, न्यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट के अनुसार, मोबाइल और लैपटॉप स्क्रीन का अधिक इस्तेमाल बच्चों और वयस्कों दोनों के दिमाग को प्रभावित कर सकता है. ध्यान रखें कि हर 50–60 मिनट के बाद 5–10 मिनट ब्रेक लें, नीली रोशनी वाले डिवाइस की स्क्रीन कम करें और पर्याप्त नींद लें.
दिमाग को स्वस्थ रखने के उपाय
स्क्रीन टाइम लिमिट करें- दिन में लगातार 2–3 घंटे से ज्यादा स्क्रीन पर समय न बिताएं.
नियमित ब्रेक- हर घंटे 5–10 मिनट आंखें बंद करें और स्ट्रेचिंग करें.
नीली रोशनी से बचाव- मोबाइल और लैपटॉप पर नीली रोशनी फ़िल्टर या नाईट मोड का उपयोग करें.
सकारात्मक दिनचर्या अपनाएं- योग, ध्यान, हल्की एक्सरसाइज और प्राकृतिक रोशनी में समय बिताएं.
ये भी पढ़े–TirednessAfterWinter: सर्दियों के बाद शरीर भारी और सुस्त क्यों लगता है?

























